भोपाल। जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन 'जयस" धार-रतलाम और खरगोन में लोकसभा के लिए प्रत्याशी उतार रहा है। दो सीटों पर संगठन ने प्रत्याशी भी तय कर लिए हैं। जयस के प्रदेश अध्यक्ष अंतिम मुजाल्दा ने बताया कि धार-रतलाम में नामांकन पर्चे भरने की तारीख बुधवार को तय की जाएगी और खरगोन सीट पर चुनाव लड़ने का विचार आया है।

वहीं, अब पीसीसी अध्यक्ष व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने संगठन के कोटे से कांग्रेस विधायक बने डॉ. हीरालाल अलावा को सोमवार को बुलाकर हिदायत दी है कि वह जयस को चुनाव में प्रत्याशी नहीं खड़ा करने के लिए मनाएं। मुलाकात के बाद दुविधा में पड़े डॉ. अलावा ने रात को फेसबुक पोस्ट में संगठन को चुनाव लड़ने से रोकना मुश्किल बताकर अपनी असमर्थता जता दी है।

जयस ने दो दिन पहले कुक्षी में बैठक कर धार लोकसभा से महेंद्र कन्नौज और रतलाम से कमलेश डोडियार को प्रत्याशी बनाए जाने का फैसला किया। इसके बाद सोमवार को मुख्यमंत्री कमलनाथ से पीसीसी के अनुसूचित जनजाति विभाग के अध्यक्ष अजय शाह ने डॉ. हीरालाल अलावा और उनके साथियों की मुलाकात कराई थी। सूत्र बताते हैं कि सीएम ने जयस नेता और कांग्रेस विधायक डॉ. अलावा को संगठन को मनाने की जिम्मेदारी दी है कि वे किसी प्रत्याशी को खड़ा नहीं करें।

वहीं, इस मुलाकात के बाद रात को ही डॉ. अलावा ने फेसबुक पोस्ट की, जिसमें उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनावों में भागीदारी को लेकर अपना पक्ष रखा है। पोस्ट में जयस को एक भी लोकसभा सीट नहीं दिए जाने और सरकार में भी भागीदारी नहीं दिए जाने का हवाला देते हुए डॉ. अलावा ने कहा कि ऐसे में वे जयस के युवाओं को चुनाव लड़ने से नहीं रोक पाएंगे।

फेसबुक पोस्ट में मुख्यमंत्री द्वारा जयस के चुनाव लड़ने पर यह समझे जाने की बात लिखी गई कि पार्टी समझेगी, जयस कांग्रेस के खिलाफ है। डॉ. अलावा ने पोस्ट में जयस के युवाओं को समझना हमारे लिए मुश्किल है। अलावा ने कहा कि आगे क्या परिणाम होंगे हमें नहीं पता।

कांग्रेस को मुसीबत बनेगी

जयस के चुनाव मैदान में उतरने के बाद मालवा-निमाड़ की धार, खरगोन और रतलाम लोकसभा सीटों पर कांग्रेस को नुकसान होगा। यही नहीं बैतूल लोकसभा सीट पर भी जयस का प्रभाव है, जिससे वहां भी पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी को मुश्किल जाएगी। गौरतलब है कि जयस ने विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को समर्थन दिया था और कांग्रेस ने संगठन के डॉ. हीरालाल अलावा को टिकट भी दिया था।

इसके चलते मालवा-निमाड़ में कांग्रेस को 21 अनुसूचित जनजाति आरक्षित सीटों में से 15 पर जीत हासिल हुई थी। अगर जयस ने यहां कांग्रेस से अलग होकर चुनाव लड़ा तो अनुसूचित जनजाति वाली धार, खरगोन व रतलाम लोकसभा सीट ही नहीं देवास और खंडवा लोकसभा सीटों पर कांग्रेस को नुकसान होने की संभावना है।


जयस के नेताओं को समझाने की सलाह

विधायक डॉ. हीरालाल अलावा जयस नेता हैं और उनसे लोकसभा चुनाव में जयस के प्रत्याशी नहीं खड़े हों, यह संगठन के नेताओं को समझाने की सलाह दी है।

- अजय शाह, अध्यक्ष अनुसूचित जनजाति विभाग, मप्र पीसीसी