भोपाल। भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने छत्तीसगढ़ में जिस तरह सारे सांसदों के टिकट काटने का फैसला लिया, उसका असर मप्र में भी दिख सकता है। मध्यप्रदेश में भी 15 लोकसभा सीट ऐसी हैं, जहां विधानसभा चुनाव में भाजपा का सूपड़ा साफ हो गया। इन क्षेत्रों की आठ विधानसभा सीटों में से अधिकांश सीट पर भाजपा हार गई।

भाजपा सूत्रों के मुताबिक छत्तीसगढ़ की तर्ज पर मप्र में भी भाजपा के कई दिगगज सांसद घर बैठ सकते हैं। पार्टी के सर्वे में भी 14 सीटें ऐसी हैं, जहां पार्टी को प्रत्याशी के खिलाफ नाराजी मिली है। इसके अलावा विधानसभा में जहां-जहां पार्टी हारी है, उन सीटों पर परिवर्तन किए जाने के आसार हैं।

जिन लोकसभा क्षेत्रों में भाजपा को आधी से ज्यादा सीटों पर हार का सामना करना पड़ा, उनकी संख्या 15 है। प्रदेश प्रभारी व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे का कहना है कि केंद्रीय समिति सारे पक्षों को देखकर फैसला लेगी।

यहां भाजपा कमजोर

मुरैना - सांसद अनूप मिश्रा की सीट में भाजपा को आठ में मात्र एक सीट मिली है।

भिंड- यहां भी आठ में से भाजपा के खाते में मात्र दो सीट आई हैं। यहां से डॉ. भागीरथ प्रसाद सांसद हैं।

ग्वालियर- केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की इस सीट पर भी भाजपा को एक सीट मिली, इसलिए तोमर अब मुरैना से चुनाव लड़ना चाह रहे हैं।

दमोह - सांसद प्रहलाद पटेल के इलाके में भाजपा को आठ में तीन सीट मिली।

बैतूल- ज्योति धुर्वे की सीट पर भी भाजपा चार-चार की बराबरी पर रही परंतु जाति प्रमाण पत्र मामले के कारण उनकी स्थिति कमजोर है।

बालाघाट- सांसद बोधसिंह भगत के लोकसभा क्षेत्र में आठ में से मात्र तीन सीट भाजपा जीत पाई।

मंडला- फग्गनसिंह कुलस्ते की आदिवासी सीट पर भाजपा को मात्र दो सीट पर जीत मिली। सर्वे में भी कमजोर।

राजगढ़- रोडमल नागर की सीट में भाजपा को मात्र दो सीट पर जीत मिली। कई जगह सांसद का विरोध।

उज्जैन- सांसद चिंतामणि मालवीय के यहां आठ में भाजपा तीन सीटें जीत पाई। स्थानीय नेताओं के साथ पटरी नहीं बैठती।

खंडवा- सासंद नंदकुमार सिंह चौहान के क्षेत्र में भी तीन सीट भाजपा को मिली।

खरगोन- सांसद सुभाष पटेल के लोकसभा क्षेत्र में भाजपा के खाते में मात्र एक सीट आई।

धार- सांसद सावित्री ठाकुर के इलाके में जयस का प्रभाव। विधानसभा चुनाव में मात्र दो सीटें भाजपा को मिलीं।

शहडोल- सांसद ज्ञान सिंह की सीट पर चार-चार से बराबरी रही पर सांसद से लोग नाराज। हिमाद्री सिंह की प्रत्याशी बनाने की संभावना।

मंदसौर- सांसद सुधीर गुप्ता के क्षेत्र में आठ में से सात सीट भाजपा ने जीती, लेकिन गुप्ता के प्रति क्षेत्र में नाराजी।

भोपाल- सांसद आलोक संजर की सीट पर भाजपा ने पांच विधानसभा सीट जीती, लेकिन बदलाव की तैयारी।

छिंदवाड़ा- सभी आठ सीटों पर भाजपा हार गई।

गुना - ज्योतिरादित्य सिंधिया की इस सीट पर भाजपा को तीन सीट पर जीत मिली है।

रतलाम- आदिवासी सीट की आठ सीटों में से भाजपा को मात्र तीन सीट मिली। ये सीट कांग्रेस के कब्जे में है।

इधर, बराबरी पर भाजपा हारी

टीकमगढ़- केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार के क्षेत्र में भाजपा को चार सीट मिली मिली।

जबलपुर- भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष की सीट में चार पर भाजपा और चार पर कांग्रेस जीती।

इंदौर- लोकसभा स्पीकर की सीट में भी विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस बराबरी पर रहे।

जहां मजबूत है भाजपा

सागर- लक्ष्मीनारायण यादव की सीट पर भाजपा सात सीटों पर जीती, लेकिन उनका बेटा सुधीर यादव हार गया।

खजुराहो- भाजपा को यहां आठ में छह सीटें मिली।

होशंगाबाद- सांसद उदयप्रताप सिंह के लोकसभा क्षेत्र में पांच पर भाजपा और तीन पर कांग्रेस जीती।

सतना- गणेश सिंह की सीट में भाजपा के खाते में पांच सीटें आई।

रीवा- सांसद जनार्दन मिश्रा के यहां आठ में आठ भाजपा ने जीती पर पार्टी सर्वे में बदलाव बताया।

सीधी- रीति पाठक के क्षेत्र में भी सात सीट भाजपा ने जीती।

विदिशा- विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की सीट पर भाजपा छह सीट पर जीती। नया चेहरा दिल्ली से तय होगा

देवास- सांसद रहे मनोहर ऊंटवाल की जगह नए चेहरे की तलाश। चार-चार की बराबरी पर रहा विधानसभा चुनाव का परिणाम।