अब्बास अहमद, भिंड। लोकसभा चुनाव में भाजपा से लड़ने के साथ कांग्रेस नेताओं में शह-मात की लड़ाई छिड़ी हुई है। ग्वालियर-चंबल की 4 सीटों पर टिकट वितरण के बाद से राजा (पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह) और महाराजा (सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया) के बीच शह मात का खेल जारी है। इस खेल में टिकट वितरण के बाद पहला दांव भोपाल में दिग्विजय सिंह ने चला। उन्होंने ग्वालियर के नेता साहब सिंह गुर्जर की कांग्रेस में वापसी कराई। वापसी के संबंध में सिंधिया से मशविरा नहीं किया गया। इसके जवाब में सिंधिया ने पूर्व मंत्री चौधरी राकेश सिंह की 6 साल बाद कांग्रेस में वापसी करा दी। बताया जा रहा है कि सिंधिया ने चौधरी की वापसी से राजा को साहब सिंह की वापसी का जवाब दिया है। अब 23 मई को नतीजे तय करेंगे कि राजा और महाराजा के बीच इस शह-मात की लड़ाई में हार किसकी हुई और जीत किसके हिस्से आई।

सिंधिया के गढ़ में राजा ने कराए टिकट

ग्वालियर-चंबल में 4 सीट भिंड-दतिया, ग्वालियर, मुरैना-श्योपुर और शिवपुरी-गुना हैं। गुना से कांग्रेस महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया खुद प्रत्याशी हैं। बाकी बची तीन सीट में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ग्वालियर में अशोक सिंह और भिंड देवाशीष जरारिया को टिकट दिलाने में सफल रहे हैं। मुरैना में सिंधिया के कोटे से रामनिवास रावत को कांग्रेस से टिकट मिला है। यहां बता दें कि संभाग की इन चारों सीटों में 32 विधानसभा हैं। इनमें 25 विधानसभा पर कांग्रेस का कब्जा है, जबकि 7 विधानसभा भाजपा के खाते में हैं। ग्वालियर चंबल की इन 25 विधानसभा में सबसे ज्यादा सिंधिया के समर्थक विधायक हैं। इसके बावजूद दिग्विजय सिंह संभाग में 2 टिकट कराने में सफल रहे हैं।

ऐसे शुरू हुआ शह-मात का खेल

2018 के विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने से सिंधिया समर्थक साहब सिंह गुर्जर ने बसपा का दामन थामा और ग्वालियर ग्रामीण सीट से चुनाव लड़े। इस सीट पर सिंधिया ने मदन कुशवाह को उतारा था। चुनाव नतीजे आए तो मदन कुशवाह 38199 वोट लेकर तीसरे नंबर पर रहे। जीत भाजपा के भारत कुशवाह की हुई। भारत कुशवाह को 51033 वोट मिले। सिंधिया से रूठे साहब सिंह 49516 वोट लेकर दूसरे स्थान पर रहे। साहब 1517 वोटों से चुनाव हारे थे। प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनने के बाद माना जा रहा था सिंधिया की बिना मर्जी उनकी वापसी नहीं हो पाएगी, लेकिन 2 दिन पहले भोपाल में दिग्विजय सिंह ने साहब की घर वापसी करा दी। जवाब में अगले ही दिन शनिवार को सिंधिया ने शिवपुरी के मंच से 2013 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए पूर्व मंत्री चौधरी राकेश सिंह को वापस ले लिया।

चौधरी 2018 में भाजपा से भिंड में चुनाव लड़े थे, उन्हें 33211 वोट मिले थे। वे बसपा के संजीव सिंह संजू से 35896 वोटों से हारकर दूसरे नंबर पर रहे थे। बताया जा रहा है शिवपुरी के मंच से कांग्रेस में वापस आए चौधरी की कांग्रेस के दूसरे खेमों में खबर नहीं थी। यहां बता दें, भाजपा में जाने से पहले चौधरी दिग्विजय सिंह के खेमे से देखे जाते थे। अब घर वापसी के बाद साहब सिंह और चौधरी के नेता बदल गए हैं। साहब सिंह दिग्गी के समर्थक होंगे तो चौधरी सिंधिया खेमे में रहेंगे।

गुर्जर से ग्वालियर और चौधरी से साधेंगे मुरैना

ग्वालियर में कांग्रेस प्रत्याशी अशोक सिंह का टिकट दिग्गी का माना जा रहा है। ऐसे में साहब सिंह को वापस लेकर दिग्विजय सिंह ने साहब सिंह गुर्जर के जरिए अशोक सिंह की ताकत बढ़ाई है। वहीं मुरैना में कांग्रेस प्रत्याशी रामनिवास रावत सिंधिया समर्थक हैं। पूर्व मंत्री चौधरी राकेश सिंह को वापस लेकर सिंधिया ने मुरैना में रामनिवास रावत को मजबूत किया है। 2013 में चौधरी जब कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए थे तो बताया जा रहा था कि उनकी मांग मुरैना से लोकसभा लड़ने की है। मुरैना में चौधरी का सजातीय वोटों में अच्छा दखल है।

दिल्ली में हुई थी मुलाकात वापसी टल रही थी

विधानसभा चुनाव हारने के बाद चौधरी का भाजपा से पूरी तरह से मोहभंग हो चुका था। वे भाजपा की स्थानीय बैठकों और लोकसभा चुनाव में बिलकुल हिस्सा नहीं ले रहे थे। लोकसभा चुनाव की घोषणा के बाद जब सिंधिया से दिल्ली में मुरैना के महापौर अशोक अर्गल ने मुलाकात की। इसी दौर में 2 दिन बाद चौधरी ने भी दिल्ली जाकर सिंधिया से मुलाकात कर कांग्रेस में वापस आने की इच्छा जाहिर कर दी थी, लेकिन पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल भैया की नाराजगी के चलते वापसी पर फैसला नहीं हो पा रहा था। ऐसे में जब भोपाल में साहब सिंह की वापसी कराई गई तो सिंधिया ने चौधरी की वापसी करा दी।