नई दिल्ली। भड़काऊ और विवादित बयान देने के लिए चुनाव आयोग ने योगी आदित्यनाथ, मायावती, मेनका गांधी और आजम खान के चुनाव प्रचार पर 2 से 3 दिन का प्रतिबंध लगाया है। चुनाव आयोग ने पहली बार ऐसी कार्रवाई नहीं की है। 2014 में अमित शाह, आजम खान और बाबा रामदेव के खिलाफ भी यह सख्त कदम उठाया जा चुका है। वैसे आचार संहिता के उल्लंघन की पहली बड़ी कार्रवाई 1999 में हुई थी, तब शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे पर 1999 से 2001 तक पाबंदी लगाई गई थी। ठाकरे न मतदान कर सके थे और न चुनाव लड़ सके थे। 2001 में यह प्रतिबंद हटा तब 2004 में उन्होंने मतदान किया था।

बाल ठाकरे के खिलाफ 1987 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान निर्दलीय प्रत्याशी प्रभाकर कुंते के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी का थी। उस उपचुनाव में शिवसेना प्रत्याशी ने कुंते को हरा दिया था। कांग्रेस का आरोप था कि ठाकरे ने धर्म के नाम पर वोट मांगकर जीत हासिल की है। ठाकरे के बयान के खिलाफ कुंते ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट के आदेश के बाद ही चुनाव आयोग ने ठाकरे पर प्रतिबंध लगाया था।

जानिए 2014 में क्या हुआ था

2014 के लोकसभा चुनाव में अमित शाह, बाबा रामदेव और आजम खान को बयानबाजी भारी पड़ी थी। आजम खान ने तब यूपी की एक रैली में मुस्लिमों के खिलाफ टिप्पणी की थी। शाह पर एक हफ्ते का बैन लगा था। बाबा रामदेव ने तब नरेंद्र मोदी के लिए प्रचार किया था और राहुल गांधी के खिलाफ अशिष्ट बात कही थी। रामदेव ने कहा था, राहुल गांधी हनीमून और पिकनिक मनाने के लिए दलितों के घर जाते हैं। इसके चलते रामदेव के खिलाफ लखनऊ और अहमदाबाद में एफआईआर भी हुई थी। तब हिमाचल प्रदेश और लखनऊ में बाबा के प्रचार पर रोक लगाई गई थी।