नई दिल्ली। दिल्ली की जंग को फतह होने में अब सिर्फ कुछ ही समय बाकी है। गुरुवार को सियासी जंग के नतीजों का आगाज शुरू होगा और धीरे-धीरे देर रात तक तस्वीर कुछ हद तक साफ हो जाएगी कि सियासत का सरदार आखिर कौन होगा और किसके सर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का ताज सजेगा, लेकिन दिल्ली की बादशाहत पर किसका राज होगा इसमें कुछ सीटों की जीत-हार का अजीब इत्तेफाक है। जिनके बारे में कहा जाता है कि जो पार्टी इन सीटों पर जीत दर्ज करती है उस पार्टी की सरकार देश में बनती है।

मुल्क की सियासत की दिशा तय करने वाली एक ऐसी ही सीट नई दिल्ली की है। जिसके बारे में कहा जाता है कि, जो पार्टी इस सीट अपना परचम फहरा देती है देश में उसी के नेतृत्व में सरकार बनती है। नई दिल्ली सीट के पिछले छह बार के मुकाबलों पर अगर गौर करें तो जिस पार्टी के उम्मीदवार को विजय मिली है उस पार्टी का देश की सियासत पर कब्जा रहा है।

1996 और 1998 में जगमोहन मे की थी जीत दर्ज

सबसे पहले 1996 की यदि बात करें तो यह वह दौर था जब भाजपा ने पहली बार सत्ता का स्वाद चखा था। उस वक्त भाजपा के जगमोहन ने नई दिल्ली सीट से जीत दर्ज की थी। देश में उस वक्त अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में 13 दिन की एनडीए की सरकार बनी थी हालांकि बहुमत सिद्ध न कर पाने पर जल्द गिर गई थी। 1998 में फिर जगमोहन को भाजपा ने टिकट दिया और वह कांग्रेस के आर के धवन को हराकर निर्वाचित घोषित किए गए थे। उस समय केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनी थी।

1999 में फिर जगमोहन

1999 का लब्बोलुबाब भी कुछ ऐसा ही था और नई दिल्ली सीट से आमने-सामने थे भाजपा के जगमोहन और कांग्रेस के आर के धवन। बाजी एक बार फिर जगमोहन के हाथ लगी और देश में एक बार फिर अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनी थी।

2004 और 2009 में अजय माकन

2004 में नई दिल्ली सीट की जीत का गणित को पहले जैसा ही रहा, लेकिन देश की सियासत का नक्शा बदल गया। 2004 में लगातार तीन बार से नई दिल्ली फतह कर देश में एनडीए की सरकार बनाने वाले जगमोहन को हार का सामना करना पड़ा। इस बार कांग्रेस के अजय माकन ने इस सीट से जीत दर्ज की और केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए की सरकार बनी। 2009 में कांग्रेस के अजय माकन ने भाजपा के विजय गोयल को शिकस्त दी और फिर से मनमोहन सिंह के नेतृत्व में यूपीए की सरकार बनी।

2014 में मीनाक्षी लेखी

2014 में सियासत के समीकरण फिर बदले और देश की सियासत में फेरबदल हो गया। 2014 में भाजपा की मीनाक्षी लेखी ने आम आदमी पार्टी के आशीष खेतान को शिकस्त दी और देश में भारी बहुमत के साथ भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए की सरकार बन गई। दिलचस्प बात यह थी कि पिछले दस साल से देश में सत्ता की कमान संभालने वाली कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार अजय माकन तीसरे नंबर पर चले गए।

इस बार एक बार फिर भाजपा ने मैदान मे मीनाक्षी लेखी को उतारा है। उनके सामने आम आदमी पार्टी के ब्रजेश गोयल और कांग्रेस के अजय माकन है। देखना यह है कि इस बार सत्ता का यह समीकरण बरकरार रहता है या सत्ता की कोई नई इबारत लिखी जाएगी।