मल्टीमीडिया डेस्क। 11 अप्रैल, गुरुवार को लोकसभा चुनाव के लिए पहले चरण का मतदान हो रहा है। 20 राज्यों की जिन 91 सीटों पर प्रत्याशियों की किस्मत ईवीएम में कैद हो जाएगी, उनमें महाराष्ट्र की 7 सीटें भी शामिल हैं। महाराष्ट्र में लोकसभा की कुल 48 सीटें हैं, जिनमें से वर्धा, रामटेक, नागपुर, भंडारा-गोंदिया, गडचिरौली-चिमूर, चंद्रपुर और यवतमाल-वाशिम सीट पर पहले चरण में मतदान हो रहा है। (नीचे पढ़िए हम मुकाबलों के बारे में) हर सीट अहम है, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा नागपुर सीट को लेकर है। यहां से केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी मैदान में हैं। कांग्रेस ने नाना पटोले को मैदान में उतारा है।

वर्धा का मिजाज नहीं भांप पाते राजनेता

वर्धा के मतदाताओं का मिजाज समझना राजनेताओं के लिए टेढ़ी खीर रहा है। 1999 में यह सीट कांग्रेस के पास थी। 2004 में भाजपा जीती। 2009 में फिर कांग्रेस के दत्ता मेघे जीते और 2014 में भाजपा फिर जीतने में कामयाबी रही, जब रामदास चंद्रभानजी ने सागर दत्तात्रेय मेघे को हरा दिया। भाजपा ने मौजूदा सांसद को टिकट दिया है। वहीं कांग्रेस ने चारुलता टोकस पर दांव लगाया है। बसपा ने भी शैलेश कुमार अग्रवाल को उतारा है।

भंडारा-गोंदिया: भाजपा का गढ़, बसपा काटेगी कांग्रेस के वोट

यह सीट भाजपा का गढ़ रही है। 1999 में चुन्नीलाल ठाकुर, तो 2004 में शिशुपाल नत्थू जीते थे, लेकिन 2009 में एनसीपी के प्रफुल्ल पटेल ने सीट छीन ली, जिसे 2014 में नानाभाऊ पटोले की जीत के साथ भाजपा ने फिर हासिल कर लिया। इस बार राकांपा ने पंचबुद्धे नाना जयराम को टिकट दिया है तो भाजपा ने सुनील बाबूराव मेढे पर भरोसा दिखाया है। बसपा यहां कांग्रेस के वोट काट सकती है।

गढ़चिरौली: भाजपा-कांग्रेस-बसपा के बीच त्रिकोणीय मुकाबला

2009 में कांग्रेस तो 2014 में भाजपा जीती थी। शुरू से भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला रहा है, लेकिन इस बार बसपा भी मैदान में है। भाजपा ने मौजूदा सांसद अशोक नेते को टिकट दिया है, तो कांग्रेस ने नामदेव उसेंडी पर दांव खेला है। बसपा से हरिचंद्र नागौजी उम्मीदवार हैं। बसपा का आधार देखते हुए कहा जा रहा है कि मुकाबला त्रिकोणीय होगा।

रामटेक: मुकाबला शिवसेना और कांग्रेस के बीच

यह अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट है। यह शिवसेना का गढ़ रहा है। 1999 से 2009 तक सुबोध मोहिते सांसद रहे। हालांकि 2009 में कांग्रेस के मुकुल वासनिक जीत दर्ज करने में कामयाब रहे, लेकिन 2014 में शिव सेना के कृपाल बालाजी तुमाने की जीत के साथ ही सीट फिर हथिया ली थी। इस बार शिवसेना ने फिर से कृपाल तुमाने को टिकट दिया है। कांग्रेस ने किशोर उत्तर राव को उतारा है। बसपा यहां भी मैदान में है और सुभाष धर्म दास चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन माना जा रहा है कि मुख्य मुकाबला शिवसेना और कांग्रेस के बीच ही है।

नागपुर में मुश्किल होगा गडकरी के खिलाफ इनका मुकाबला

कभी यह सीट कांग्रेस का गढ़ थी। 2014 के पहले तक कांग्रेस के विलास मुतेमवार सांसद रहे। फिर गडकरी ने दो लाख से ज्यादा वोट से जीत दर्ज की। इस बार नागपुर सीट से ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने अब्दुल करीम को टिकट दिया है। बसपा ने भी मुस्लिम प्रत्याशी पर दांव खेला है और मोहम्मद जमाल को टिकट दिया है। हालांकि सीधा मुकाबला गडकरी और नाना पटोले के बीच है।