भोपाल। Bhopal Lok Sabha Result 2019 : देश की सबसे हाई प्रोफाइल सीटों में से एक भोपाल पर साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने निर्णायक बढ़त के साथ जीत दर्ज कर ली है। साध्वी प्रज्ञा 3 लाख 20 हजार वोटों से आगे चल रही है और कुल ढाई लाख वोटों की गिनती बाकी है। ऐसे में उनकी जीत तय हो चुकी है। हालांकि इसकी आधिकारिक घोषणा बाकी है। इस सीट पर भाजपा कांग्रेस से ज्यादा साध्वी प्रज्ञा और दिग्विजय सिंह के बीच लड़ाई थी। प्रदेश की राजनीति के चाणक्य माने जाने वाले दिग्विजय सिंह ने जीते के लिए संतों की फौज तक का सहारा लिया, लेकिन चुनावी रण में साध्वी ने दिग्गी राजा पर निर्णायक बढ़ ले ली। भोपाल सीट का चुनाव बयानबाजी के लिए भी काफी सुर्खियों में रहा।

पूरे चुनाव प्रचार के दौरान दिग्विजय सिंह ने काफी नपे-तुले शब्दों में निशाना साधा, लेकिन चुनाव प्रचार के दौरान साध्वी के तल्ख तेवर बरकरार रहे। साध्वी के शाब्दिक हमले इस हद तक तीखे रहे कि कई बार हाईकमान को हस्तक्षेप करना पड़ा और उनको सोच-समझकर बोलने की सलाह दी गई। जीत की आहट के साथ ही साध्वी प्रज्ञा ने अपना मौन तोड़ा और जय श्रीराम का उदघोष किया।

दिग्विजय सिंह सुबह से ही मतगणना स्थल पर डटे रहे। उन्होंने वहां पर अपने समर्थकों के साथ चाय बिस्किट लिए, लेकिन जैसे-जैसे साध्वी और उनके बीच वोटों का फासला बढ़ता गया, उन्होंने कुछ देर बाद मतगणना स्थल को छोड़ दिया।

मध्यप्रदेश की राजनीति का केंद्र रहे भोपाल लोकसभा सीट पर बीते तीन दशकों से भाजपा का कब्जा रहा है। इसका अंदाजा भी इस बात से लगाया जा सकता है कि बीते लोकसभा चुनाव (2014) में भाजपा वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के इस सीट से चुनाव लड़ने के इंकार के बाद वर्तमान सांसद आलोक संजर को अप्रत्याशित टिकट मिला था। साथ ही उन्हें विजय हासिल हुई थी। भाजपा के किले में सेंध लगाने के लिए कांग्रेस ने इस बार पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को उतारा था।

इस लोकसभा सीट के इतिहास में पहली बार वर्ष 1951 में हुए चुनाव से लेकर 1962 तक तीन बार कांग्रेसी सांसदों ने जीत हासिल की। प्रथम लोकसभा चुनाव में सईद उल्लाह राजमी सांसद रहे फिर 1957 व 1962 में मैमूना सुल्तान जीते। इसके बाद जेआर जोशी 1967 में भारतीय जन संघ से जीते। कांग्रेस से पूर्व राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा ने 1971 में 31 हजार 412 वोटों से विजय प्राप्त की। वर्ष 1977 में डॉ. शर्मा को भारतीय लोक दल से चुनावी मैदान में खड़े आरिफ बेग ने 1 लाख 8 हजार 526 वोट से हराया। उधर, 1980 में डॉ. शर्मा 13 हजार 602 वोट से फतह हासिल की। कांग्रेस पार्टी के आरिफ बेग 1977 में इस सीट से संसद पहुंचे। इसके बाद इस सीट से लगातार भाजपा का कब्जा रहा है।

वर्ष 1989 के बाद इस सीट पर भाजपा अंगद के पांव की तरह काबिज हुई। वर्ष 1989 से 1998 तक सुशील चंद्र वर्मा चार बार सांसद रहे। इसके बाद मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती 1999 में यहां से सांसद चुनी गई। फिर भाजपा ने 2004 व 2009 में कैलाश जोशी को इस सीट से टिकट दिया। जोशी की जीत के बाद 2014 में भाजपा से आलोक संजर विजय रहे।

उलझा हुआ है जातिगत समीकरण

भोपाल लोकसभा सीट का जातिगत समीकरण भी उलझा हुआ है। यहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 5 लाख 30 हजार है। इसके अलावा ब्राम्हण, कायस्थ, आरक्षित वर्ग व क्षत्रिय मतदाताओं की संख्या सात लाख से अधिक है। लेकिन यदि इन्हें अलग-अलग बांटा जाए तो ब्राम्हण 3 लाख 50 हजार, कायस्थ 2 लाख 25 हजार, एससी-एसटी से 2 लाख और क्षत्रिय मतदाताओं की संख्या 1 लाख 25 हजार है। इस गणित के कारण यहां अल्पसंख्यक मतदाता निर्णायक भूमिका में माना जाता है।