उज्जैन, नईदुनिया प्रतिनिधि। उज्जैन-आलोट संसदीय क्षेत्र से कभी कोई महिला सांसद नहीं बनी है। प्रमुख राजनीतिक दल भाजपा और कांग्रेस इस बार भी महिला की बजाय पुरुष को ही मैदान में उतारने की तैयारी में हैं। इस सीट पर भाजपा की पकड़ मजबूत रही है। शुरुआती सालों में कांग्रेस यहां से लगातार चुनाव जीती, मगर बाद में हारती चली गई। दोनों दलों ने कभी महिला प्रत्याशी को मैदान में नहीं उतारा। हर बार पुरुष ही जीते और हारे।

भाजपा के डॉ. सत्यनारायण जटिया के नाम यहां से सर्वाधिक 6 बार चुनाव जीतने का रिकॉर्ड है। फिलहाल यहां भाजपा के ही चिंतामणी मालवीय का कब्जा है, लेकिन प्रदेश में सत्ता बदलने से अब यहां भाजपा के लिए पार पाना आसान नहीं है। कांग्रेस विधानसभा चुनाव में क्षेत्र की 8 में से 5 सीटें जीतकर ताकत दिखा चुकी है। तब भी दोनों प्रमुख दलों ने उक्त सभी सीटों पर प्रत्याशी बतौर पुस्र्षों को उतारा था। अब लोकसभा चुनाव में भी पुस्र्षों को ही टिकट दिए जाने की कवायद है।

सिर्फ एक-एक नाम : दोनों दलों की उम्मीदवारों की सूची में पुरुषों के दर्जनभर नाम हैं, मगर महिला उम्मीदवार के रूप में सिर्फ एक-एक नाम शामिल है। भाजपा से महापौर मीना जोनवाल का और कांग्रेस से तराना के विधायक महेश परमार की बहन सीमा परमार का। अब देखना है कि चुनाव लड़ने के लिए भाजपा और कांग्रेस किसे टिकट देती है।