अपने आवाज के जादू से महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू, सरोजनी नायडु जैसी शख्सियतों का भी मन मोह लेने वाली भजन गायिक जुथिका रॉय का साउथ कोलकाता हॉस्पिटल में निधन हो गया। वे 94 साल की थीं। सांस संबंधित समस्या और ढ़लती उम्र के कारण उन्हें जनवरी में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। रॉय ने बुधवार रात 11.30 बजे अंतिम सांस ली। यह जानकारी उनके भतीजे चंदन रॉय ने जानकारी दी थी।

20 अप्रैल 1920 में बंगाल के अविभाजित हावड़ा जिले में जन्मी जुथिका मीरा के भजनों के लिए विशेष रूप से पहचानी जाती थी। जुथिका रॉय को ख्याति 1930 में मिली। उन्हें मीरा के मधुर भजनों के लिए 'आधुनिक मीरा' के नाम से भी जाना जाता था। वे जब 12 साल की थीं तब उन्होंने अपना पहला एलबम 1932 में रिकॉर्ड किया था।

रॉय की प्रतिभा को कवि काजी नजरूल इस्लाम और कम्पोजर कमल दास गुप्ता ने पहचाना था और ये दोनों ही उनके मेंटर रहे। 1940 व 1950 में वे देश के लीडिंग सिंगर्स में से एक थीं।

उनके भजन 'घुंघट के पट खोल' और 'पग घंघरू बांध मीरा नाची' काफी लोकप्रिय थे। उन्हें 1972 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।

15 अगस्त 1947 को भारत के पहले स्वतंत्रता दिवस पर नेहरूजी ने झंडा फहराने के साथ उन्हें रेडियो पर लगातार गाने की विनती की थी। उन्हें नेहरूजी ने कहा था कि वे जब तक लाल किले पहुंचे और तिरंगा झंडा फहराएं तब तक वे गाती रहें।

यहीं नहीं गांधीजी जब पुणे की जेल में थे तब उनके गाने हर दिन सुनते थे। वे हर सुबह प्रार्थना सभा की शुरूआत उनके ही गाने बजाकर करते थे।

रॉय ने दो बंगाली फिल्म 'धुली' और 'रतनदीप' में अपनी मधुर आवाज भी दी है।