मल्टीमीडिया डेस्क। भारत में सिनेमाहाल जाकर फिल्में देखने वालों में गैरशादीशुदा लोगों की संख्या ज्यादा है। पुरुष हो या महिला, शादी के बाद यह सिलसिला तेजी से घट जाता है। ज्यादा फिल्में देखने वालों में 20 से 24 साल के युवा शामिल हैं। यह भी पता चला है कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, वैसे-वैसे फिल्में देखने का क्रेज घट जाता है।

यह निष्कर्ष है नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS) की ताजा रिपोर्ट का। वर्ष 2015-16 की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि 33.8 फीसदी गैरशादीशुदा पुरुष महीने में एक बार सिनेमाहाल जाकर मूवी जरूर देखते हैं, जबकि 15.1 फीसदी शादीशुदा पुरुष ही ऐसा कर पा रहे हैं।

इसी तरह 11.9 फीसदी गैरशादीशुदा महिलाएं महीने में एक बार बाहर जाकर मूवी देख लेती हैं, लेकिन शादीशुदा महिलाओं के लिए यह आंकड़ा 7.7 फीसदी है।

जितने ज्यादा पढ़े-लिखे, उतना ज्यादा फिल्मों का क्रेज

भारत में शिक्षा का सिनेमाहाल जाकर मूवी देखने से सीधा संबंध साबित हुआ है। ज्यादा पढ़े लिखे लोग सिनेमाहाल जाकर मूवी देखना ज्यादा पसंद करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 12 साल या ज्यादा की स्कूलिंग वाली महिलाओं के सिनेमाहाल जाकर मूवी देखने का आंकड़ा 20.5 फीसदी (पुरुष 35.3%) है।

जैसे-जैसे शिक्षा का स्तर बढ़ता है, वैसे-वैसे फिल्मों में दिलचस्पी बढ़ती जाती है। कभी स्कूल का मुंह नहीं देखने, लेकिन महीने में एक बार फिल्म देखने वालों की संंख्या महज 8.6 फीसदी (पुरुष) है।

20 से 24 साल के युवाओं के भरोसे सिनेमाहाल

महिला हो या पुरुष, 20 से 24 साल की उम्र में सबसे ज्यादा फिल्में देखते हैं। वहीं उम्र बढ़ने के साथ यह सिलसिला घटता जाता है। 45 साल की उम्र के बाद 9.1 फीसदी पुरुष ही फिल्म देखते हैं, जबकि महिलाओं के लिए यह आंकड़ा 4.9 फीसदी ही है। (नीचे चार्ट देखें)

पैसा से पूरा होता है फिल्मों का शौक

फिल्मों के मामले में रिपोर्ट से यह बात साबित हुई है कि पैसा शौक पूरे करने में अहम भूमिका निभाता है। ज्यादा कमाई वालीं 20 फीसदी महिलाएं हर महीने फिल्म देखने जाती हैं। पुरुषों में यह आंकड़ा 35 फीसदी है। कम कमाई के कारण 8.4 फीसदी पुरुष ही सिनेमाहाल जा पाते हैं।

शहरों की तुलना में गांवों के महिला और पुरुष कम फिल्में देख पाते हैं। पुरुषों में यह अंतर दो गुना है (32 फीसदी शहरी के मुकाबला 16.1 फीसदी ग्रामीण)। 15.8 फीसदी शहरी महिलाओं हर महीने अपना यह शौक पूरा करती हैं, वहीं ग्रामीण महिलाओं की संख्या महज 4.7 फीसदी है।