नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी अपनी फिल्म 'मंटो' को लेकर इन दिनों चर्चा में हैं। उन्होंने यह बात स्वीकारी कि उनकी हमेशा से चाहत थी कि वह कोई ऐसा किरदार निभाएं, जो कि मंटो पर आधारित हो।

नवाज कहते हैं कि मंटो की यह खासियत उन्हें प्रभावित करती थी कि वे हमेशा सच का साथ देने में यकीन करते थे, फिर चाहे उसके लिए उन्हें कोई जोखिम ही क्यों ना उठाना पड़े। नवाज का मानना है कि सच कहना और सच का साथ देना एक कठिन प्रक्रिया है। नवाज को इस बात की तकलीफ़ है कि उनकी ऑटो बायोग्राफी को लेकर काफी हंगामा हुआ जबकि उन्होंने सच ही लिखा था। वे कहते हैं कि अब वह दोबारा किताब लिखेंगे और इस बार सब झूठ लिखेंगे। चूंकि सच कहना जितना मुश्किल है उससे अधिक सुनना मुश्किल है।

उनका कहना है 'मैंने अपने किताब के बारे में लिखा तो उसमें जितने पन्ने थे, उसमें सिर्फ मेरे रिलेशनशिप के बारे में ही नहीं था। उसके अलावा भी बहुत कुछ था, उसमें मैंने अपनी पूरी जर्नी की कहानी ठीक वैसी ही लिखी थी, जैसी कहानी मैंने अपनी जिंदगी में जी है। लेकिन सच कहने के बाद विवाद हो गया। मैं मानता हूं कि हां मुझे नाम नहीं लेना चाहिए था। लेकिन उसके अलावा भी उस किताब में मैंने वहां की सारी बात लिखी थी जो सच थी। किसी का ध्यान उस पर नहीं गया।'

नवाज आगे कहते हैं कि वे दोबारा भी किताब लिखूंगा तो लोग पढ़ेंगे क्योंकि फेमस लोगों के बारे में बात करना चाहते हैं। नवाज को इस बात की भी तकलीफ़ है कि उन्होंने अपने पूरी किताब में कहीं भी बेवजह का ग्लोरीफिकेशन करने की कोशिश नहीं की थी।

वे खुद को आम लोगों के बीच का ही स्टार मानते हैं लेकिन वह इस बात को अपने दिमाग पर लेना नहीं चाहते हैं कि वह शानदार अभिनेता हैं, क्योंकि वह कहते हैं कि जिस दिन मेरे दिमाग में यह बात आ जाएगी मैं सीखना छोड़ दूंगा। इसलिए मैं सीखते रहना चाहता हूं। नवाज की फिल्म 'मंटो' के बाद बाला साहेब ठाकरे की फिल्म जल्द ही दर्शकों के सामने आएंगे। रजनीकांत के साथ भी जल्द ही उनकी फिल्म सामने होगी।