फ़िल्ममेकर सुधीर मिश्रा 'दास देव' बना रहे हैं और इसकी पहली झलक 14 फरवरी को दिखी। मेकर्स ने वैलेंटाइन्स डे पर इसका ट्रेलर रिलीज किया है। ट्रेलर जबरदस्त है और फिल्म देखने के लिए उत्सुकता पैदा करता है।

एक बार फिर 'देव दास' की कहानी सामने आ रही है। इस फ़िल्म को पहले 16 फरवरी को रिलीज़ होना था, अब ये 9 मार्च को लग रही है। अब इसकी टक्कर 'हेट स्टोरी 4' से होना तय है।

'दास देव' की बात करें तो फ़िल्म में देवदास के रोल में राहुल भट्ट दिखाई देंगे। सुधीर का ये देवदास थोड़ा अलग होगा, क्योंकि फ़िल्म की पृष्ठभूमि राजनीति रखी गई है। फ़िल्म में रिचा चड्ढा ने 'पारो' और अदिति राव हैदरी ने 'चांदनी' का रोल किया है। पिछले दिनों इस फिल्म का पोस्टर भी जारी हुआ था।

ट्रेलर में राहुल भट्ट को रिचा चड्ढा और अदिति के साथ इश्क लड़ाते देखा जा सकता है। राजनीति हावी लग रही है, बजाय प्रेम कहानी के।

देवदास पर सबसे पहले 1928 में साइलेंट फ़िल्म बनी थी, जिसे नरेश मित्रा ने डायरेक्ट किया था। उन्होंने फ़िल्म में एक रोल भी प्ले किया था। फणी बर्मा देवदास बने थे, तारकबाला पारो और पारुलबाला चंद्रमुखी के किरदार में थीं। ख़ास बात ये है कि फ़िल्म की शूटिंग कोलकाता में ही हुई थी, जहां की पृष्ठभूमि में देवदास की कहानी सेट है। ये फ़िल्म 11 फरवरी को रिलीज़ हुई थी।

1935 में पीसी बरुआ ने बंगाली में देवदास बनायी, जिसमें केएल सहगल टाइटल रोल में थे, जबकि जमुना बरुआ और राजकुमार ने क्रमश: पारो और चंद्रमुखी के किरदार प्ले किये थे। इसे 1936 में हिंदी में रिलीज़ किया गया।

1955 में बिमल रॉय के डायरेक्शन में दिलीप कुमार देवदास बने। ये हिंदी सिनेमा की क्लासिक फ़िल्मों में शामिल है। दिलीप कुमार को इस फ़िल्म के बाद ट्रेजडी किंग कहा जाने लगा। देवदास पर बनी ये सबसे प्रभावी फ़िल्मों में शामिल है। फ़िल्म में सुचित्रा सेन पारो और वैजयंतीमाला चंद्रमुखी के किरदार में थीं।

2002 में संजय लीला भंसाली ने शाहरुख़ ख़ान को 'देवदास' बनाकर अमर कर दिया। फ़िल्म में माधुरी दीक्षित ने चंद्रमुखी और ऐश्वर्या राय ने पारो का रोल निभाया।

देवदास का एक वर्ज़न ऐसा भी है, जिसे गुलज़ार बनाना चाहते थे। इस फ़िल्म में देवदास के किरदार के लिए धर्मेंद्र को चुना था, जबकि चंद्रमुखी और पारो के किरदारों के लिए उन्होंने शर्मिला टैगोर और हेमा मालिनी को फाइनल किया था। फ़िल्म का मुहूर्त भी हुआ, लेकिन बदकिस्मती से फ़िल्म इससे आगे नहीं बढ़ सकी। धर्मेंद्र को भी इसके बाद गुलज़ार के निर्देशन में काम करने का मौक़ा नहीं मिला। सोचिए, अगर ये फ़िल्म बनकर रिलीज़ होती तो धर्मेंद्र को देवदास के किरदार में देखना कितना दिलचस्प अनुभव होता।

धर्मेंद्र भले ही देवदास बनने से चूक गए हों, लेकिन उनके भतीजे अभय देओल के ये मौक़ा मिल गया, जब अनुराग कश्यप ने उन्हें 'देव डी' में देवदास का किरदार निभाने का मौक़ा दिया था।