अहमदाबाद। गुजरात का एक परिवार हिंदू और मुस्लिम धर्म दोनों ही सालों से निभाता आ रहा है। यह परिवार है सैटेलाइट निवासी जिग्नेश मोदी का जो कि हिंदू होने के बावजूद इस्लाम में किया जाने वाला दान-पुण्य भी करते आ रहे हैं। गरीबों की मदद करते हैं। वे हर ईद पर 40 किलो शीर खुर्मा बनाते हैं और एक महीने तक चले रमजान के रोजों का जश्न मनाते हैं।

मोढ मोदी जाति का यह परिवार मोरबी जिले के आमरान में हजरत दवलशा पीर को मानने वाले उन 500 परिवारों में से एक हैं, जो हिंदू-मुस्लिम दोनों धर्मों को मनाते हैं। जिग्नेश मोदी के परिवार में यह चलन सैकड़ों सालों से चलाआ रहा है।

ये है मान्यता

डेयरी बिजनेस करने वाली मोदी कहते हैं, 'मेरे परिवार का हजरत दवलशा पीर से जुड़ाव 125 साल पुराना है जब परदादा दरगाह पर बच्चे की चाह की मन्नत मांगी थी। उनका हर बच्चा पैदा होने के बाद मर जाता था। दरगाह पर मन्नत का असर हुआ और उनके एक के बाद एक 7 बच्चे हुए। उनके बाद से उनका परिवार हमेशा हजरत को फॉलो करता है।'

दिलचस्प बात यह है कि उनके परिवार की कुलदेवी बहूचर माता हैं और वे सारे हिंदू और मुस्लिम त्योहार उतने ही जश्न के साथ मनाते हैं। उनके परिवार में पहले हिंदू रीति-रिवाज से शादी होती है और उसके अगले दिन पीर की दरगाह पर दुआ मांगने जाते हैं।

इस बड़े परिवार के सदस्य रूपेश सिंगा के मुताबिक तीन दशक से वह रोजा रख रहे हैं। वे कहते हैं, हम गणेशजी को भी घर लाते हैं, मेरी पत्नी देरावशी रोजा रखती है। यह सभी आस्था की बात है क्योंकि हमें अमरान दरगाह जाकर शांति मिलती है।


हजरत दवलशा पीर के बारे में गुजरात में 15वीं सदी में सुल्तान रहे महमूद बेगडा के समय से जाना जाता है। उन्होंने चंपानेड़-पवागढ़ किला जीतने में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने बाद में अपना जीवन अध्यात्म के नाम कर दिया था। उनका उर्स सालाना जून-जुलाई में मनाया जाता है जब भक्त चादर चढ़ाने आते हैं।