नई दिल्ली दूसरे विश्वयुद्ध के समय का जांबाज युद्धक विमान डकोटा डीसी-3 फिर से वायु सेना में शामिल किया जाएगा। यह वायु सेना के गाजियाबाद स्थित हिंडन स्टेशन पर विरासती बेड़े का हिस्सा होगा।

यह लड़ाकू विमान बुधवार को गुजरात के जामनगर एयर स्टेशन पर पहुंच गया। गुरुवार को यह हिंडन के लिए उड़ान भरेगा। 1947-48 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में डकोटा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

27 अक्टूबर, 1947 को इसने पहले सिख रेजिमेंट के जवानों को श्रीनगर पहुंचाया था। समय रहते सैनिक कार्यवाई करते हुए भारत कश्मीर घाटी और पुंछ को पाकिस्तान के हाथों जाने से बचाने में कामयाब हो सका।

इसके अलावा शरणार्थियों को ले जाने और रसद आपूर्ति में भी इसकी अहम भूमिका रही। 1988 तक बड़ी संख्या में डकोटा विमान वायुसेना में शामिल रहे। राज्यसभा सदस्य राजीव चंद्रशेखर यह विमान वायुसेना को तोहफा के रूप में भेंट कर रहे हैं।

जामनगर एयरस्टेशन पहुंचा

वायुसेना का डकोटा डीसी -3 विमान जामनगर एयरस्टेशन पहुंचा। पूरी तरह से नवीनीकृत विश्व युद्ध - II में अहम भूमिका निभाने वाले डकोटा डीसी -3 विमान जिसका निर्माण 1944 में किया गया।

27 अक्टूबर 1947 में इसने सिख रेजीमेंट को एक स्थल से दूसरे पर ले जाकर अपनी सेवाएं शुरू की। राज्यसभा सांसद राजीव चंद्रशेखर ने 2011 में इस विमान को कबाड में जाने से बचाकर यूके में इसका पुनर्निर्माण कराया ताकि भारतीय वायुसेना को तोहफा दिया जा सके।

चंद्रशेखर के पिता सेवानिवृत्‍त एयर कमांउर डकोटा विमान के पायलट थे। 17 अप्रैल 2018 को यूके से यात्रा शुरू कर यह विमान फ्रांस, इटली, ग्रीस, जॉर्डन, सउदी अरब, बहरीन, ओमान होते हुए 24 अप्रेल को जामनगर एयरस्टेशन पहुंचा जिसका वायुसेना के अधिकारियों ने गर्मजोशी से स्वागत किया।