अहमदाबाद। गुजरात हाई कोर्ट में एक ऑटोरिक्शा चालक ने अपील की है कि उसके धर्म को धर्मनिरपेक्ष, नास्तिक या राष्ट्रवादी घोषित कर दिया जाए। इससे पहले उसने जिला कलेक्टर और राजकोट गैजेट ऑफिस में भी याचिका लगाई थी, लेकिन कामयाबी नहीं मिलने के बाद कोर्ट का रुख किया।

कोर्ट को दी गई याचिका में राजवीर उपाध्याय (34) ने कहा कि संविधान हर किसी को अपने धर्म को मानने की आजादी देता है। लिखा है कि वह जातिगत व्यवस्था का सामना कर रहा है और इसलिए वह अपने धर्म को इन तीनों में से कोई एक घोषित कराना चाहता है।

राजवीर ने कोर्ट से गुजरात फ्रीडम ऑफ रिलिजन एक्ट में बदलाव करने की भी अपील की है। उन्होंने कहा है कि इस एक्ट में नास्तिक होने या धर्मनिरपेक्ष होने की बात नहीं कही गई है। उन्होंने कहा कि यह कानून मनचाहे धर्म या नास्तिक होने का पालन करने की आजादी का उल्लंघन करता है, जो कि भारतीय संविधान ने दी है और इसलिए एक्ट को बदलना चाहिए, ताकि संविधान द्वारा दी गई आजादी सुरक्षित रहे।

उन्होंने कहा कि उन्हें कोर्ट आने की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि जिला कलेक्टर ने उनकी अपने धर्म को नास्तिक में बदलने की अर्जी खारिज कर दी थी। उपाध्याय गुरु-ब्राह्मण जाति से आते हैं, जो कि एक अनुसूचित जाति है।

उन्होंने कहा कि मेरी नास्तिक या धर्मनिरपेक्ष व्यक्ति के तौर पर पहचाने जाने की अपील को प्रशासन ने खारिज कर दिया, इसलिए मैं हाई कोर्ट पहुंचा। अगर मैं अपने धर्म को धर्मनिरपेक्ष या नास्तिक नहीं कह सकता तो कम से कम मुझे राष्ट्रवादी कहे जाने की इजाजत दे दें, जिसमें किसी को कोई दिक्कत न हो।