दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने 2002 के गुजरात दंगा मामलों में से एक नरोदा पाटिया मामले में दोषी करार दिए गए चार को जमानत दे दी है। जस्टिस एएम खानविलकर व जस्टिस अजय रस्तोगी की पीठ ने मंगलवार को वकीलों की दलीलें सुनने के बाद उमेशभाई सुराभाई भरवाड़, राजकुमार, पद्मेंद्र जसवंत सिंह राजपूत और हर्षद परमार की अपील विचारार्थ स्वीकार करते हुए फिलहाल जमानत दे दी। उमेश भाई सुराभाई भड़वार को जमानत देते हुए शीर्ष कोर्ट ने कहा कि विस्तृत सुनवाई के बाद निचली अदालत ने उसे बरी किया था।

हाई कोर्ट ने फैसला पलटते हुए सजा सुनाई है। याची का नाम एफआइआर में शामिल नहीं था। पुलिस अधिकारियों ने घटना के चार दिन बाद इस दावे के साथ उसका नाम लिया कि वह 15000 की भीड़ में शामिल था। याची की शिनाख्त नहीं हुई थी। हाई कोर्ट ने सिर्फ दो पुलिसकर्मियों की गवाही के आधार पर बरी करने का आदेश पलटा है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पहली निगाह में उन्हें हाई कोर्ट का आदेश विचार करने लायक लगता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोपित ट्रायल के दौरान जमानत पर था। उस पर लगे आरोप में अधिकतम 10 साल की सजा हो सकती है साढ़े नौ महीने वह जेल में बिता चुका है। ऐसे में अपील के लंबित रहने के दौरान उसे जमानत दी जाती है। कोर्ट ने दूसरे दोषी प्रकाशभाई सुरेशभाई राठौर की अपील भी विचारार्थ स्वीकार कर ली और बेटी की शादी को देखते हुए उसे 28 जनवरी से 15 फरवरी तक अंतरिम जमानत दे दी है। उसे 15 फरवरी को फिर समर्पण करना होगा। तीसरे अभियुक्त राजकुमार उर्फ राजू को जमानत देते हुए कोर्ट ने कहा कि इस मामले में भी हाई कोर्ट ने बरी करने का आदेश पलटते हुए सजा सुनाई है।

हाई कोर्ट ने माना है कि गवाहों ने उसे 15000 की भीड़ में शामिल देखा था। हालांकि उसकी कोई विशिष्ट भूमिका नहीं दी गई है जिससे कि उसकी मौजूदगी साबित होती हो। गवाह पुलिस अधिकारी हैं। कोर्ट ने उसे जमानत दे दी। कोर्ट ने पद्मेंद्र सिंह जसवंत सिंह राजपूत को भी इसी आधार पर जमानत दी है जबकि हर्षद को जमानत देते हुए कोर्ट ने कहा है कि उसे आरोपित अपराध में अधिकतम 10 वर्ष की सजा हो सकती है जिसमें से पांच वर्ष की सजा वह काट चुका है।

गुजरात हाई कोर्ट ने नरोदा पाटिया केस में 29 आरोपितों में से 12 को दोषी ठहराए जाने पर अपनी मुहर लगाई थी जबकि बाकी 17 को बरी कर दिया था। बरी किए गए लोगों में भाजपा की पूर्व मंत्री माया कोडनानी भी शामिल थीं। सजा के खिलाफ दोषी सुप्रीम कोर्ट आए हैं। 28 फरवरी 2002 को गुजरात के अहमदाबाद में नरोदा पाटिया में दंगाई भीड़ ने लूटपाट और हमला किया था जिसमें 97 लोगों की जान गई थीं। गुजरात में यह दंगा गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस में आग लगाने की घटना के दूसरे दिन भड़का था।