सूरत। 14 फरवरी के दिन जहां देश-दुनिया में लोग प्यार का इजहार करने में लगे थे वहीं गुजरात में 8 युवतियां ऐसी थीं जिन्होंने सारी मोह माया छोड़कर धर्मा का मार्ग चुन लिया। खबरों के अनुसार सूरत में जैन समाज की आठ लड़कियों ने गुरुवार को एक साथ दीक्षा ले ली। आयार्य रश्मी रत्न सूरीजी ने इन सभी को दीक्षा दिलवाई। दशकों बाद यह दूसरा मौका है, जब एक ही दिन आठ लड़कियों ने सांसारिक माया-मोह त्यागकर संन्यास का मार्ग अपनाया है।

सूरत के कैलाश नगर जैन संघ की ओर से 14 फरवरी को एक भव्य धार्मिक समारोह का आयोजन किय गया जिसमें गुजरात, मुंबई, राजस्थान व कर्नाटक की 14 से 27 वर्ष की आठ लड़कियों ने दीक्षा ली। आचार्य गुणरत्न सूरीजी ने 18 साल पहले सूरत में ही एक साथ 28 लोगों को दीक्षा दी थी। उनकी ही शिष्या रश्मी रत्नसूरीजी वेलेंटाइन डे पर देश के विविध शहरों की आठ लड़कियों को दीक्षा दिलाकर जैन साध्वी के रूप में मान्यता दी।

राजस्थान की 22 वर्षीय पूजा छाजेड बताती हैं कि दो साल पहले दादाजी की मौत के बाद से उनका मन संसार में नहीं लग रहा था। सांसारिक माया-मोह को लेकर उनके मन में वैराग्य का भाव पैदा हो गया, जिसे रश्मी रत्नसूरीजी ने अध्यात्म में बदल दिया। वे बताती हैं कि उनका जीवन दीक्षा लेकर साध्वी बनने की कल्पना मात्र से पूरी तरह बदल गया है।

सूरत की पूजा शाह नेशनल जिम्नास्ट रह चुकी हैं। उन्होंने एमकॉम तक पढ़ाई की है। उनके अलावा सूरत की ध्रूवी कोठारी, बारडोली गुजरात की स्वीटी संघवी, मुंबई की कमलेश, टुमकुर कर्नाटक की खुशी विश्वास तथा भावनगर गुजरात की किंजल शाह सहित आठ लड़कियां सांसारिक माया-मोह त्याग कर संन्यास के मार्ग पर प्रव्रत्त होंगी।