अहमदाबाद। ई-बुक्स से गांधीवादी साहित्य को नया जीवन देने की तैयारी की जा रही है। इस इरादे के साथ गुजरात की प्रकाशन संस्था 'नवजीवन ट्रस्ट' ने राष्ट्रपिता पर आधारित अपनी सभी किताबों की ई-प्रतियां प्रकाशित करने का फैसला किया है।

नवजीवन के प्रबंध ट्रस्टी विवेक देसाई ने बताया, 'हमारी योजना नवजीवन ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित उन सभी किताबों की ई-प्रतियां बनाने की हैं जो गांधीजी द्वारा या उन पर लिखी गई हैं। हमने 150 से 200 ई-बुक बनाने का काम पूरा कर लिया है और अन्य 600 ई-बुक के काम को आगामी दो सालों में कर लिया जाएगा।'

सौ में तीस किताबें निःशुल्क

गांधी पर आधारित ई-बुक निःशुल्क या मूल किताबों की तुलना में सस्ती होंगी। योजना के अनुसार, 100 में 30 किताबें निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी।

'ई-कॉपी' योजना का मकसद

देसाई ने बताया कि महात्मा गांधी एक वैश्विक नेता हैं। पूरी दुनिया में लोग उनके बारे में जानना चाहते हैं। इस मकसद से यह योजना बनाई गई है।

गांधी जी ने की थी स्थापना

महात्मा गांधी ने 1929 में स्वराज के प्रचार के इरादे से नवजीवन ट्रस्ट की स्थापना की थी। उस समय भारत ब्रिटिश राज की गुलामी से जूझ रहा था।

आठ सौ किताबों का प्रकाशन

नवजीवन ट्रस्ट महात्मा गांधी से संबंधित और उनके विचारों पर आधारित करीब आठ सौ किताबों का प्रकाशन कर चुका है जो मुख्य रूप से हिदी, अंग्रेजी और गुजराती भाषाओं में हैं।

17 भाषाओं में आत्मकथा

महात्मा गांधी ने कुछ किताबें भी लिखी हैं जिनमें उनकी आत्मकथा 'सत्य के साथ मेरे प्रयोग' और 'हिंद स्वराज' प्रमुख हैं। उनकी आत्मकथा देश की 17 भाषाओं में प्रकाशित होती है।