शत्रुघ्न शर्मा, अहमदाबाद। पाटीदार समुदाय को ओबीसी में आरक्षण की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन को तगड़ा झटका लगा है। उमिया माता, खोडखम समेत समाज की 4 बड़ी संस्थाओं ने खुद को आंदोलन से अलग कर लिया है। आरक्षण के समर्थकों पर कांग्रेस का एजेंट होने के आरोप भी लग रहे हैं।

गुजरात में पटेल समुदाय के कड़वा पाटीदार व लेउवा पाटीदार समाज को अन्य पिछड़ा वर्ग में आरक्षण की मांग को लेकर एक माह से चल रहे आंदोलन को पटेल समाज की चार बड़ी संस्थाओं ने ही समर्थन से इनकार कर दिया है।

स्थानीय अखबारों में विज्ञापन देकर श्रीसमस्त पाटीदार समाज सूरत, श्रीउमिया माताजी संस्थान ऊंझा, श्रीउमिया माताजी संस्थान सिदसर व खोडलधम संस्थान कागवड ने साफ किया है कि आरक्षण को लेकर जो आंदोलन राज्य में चल रहा है उससे उनकी संस्थाओं का कोई संबंधित नहीं है।

संस्थाओं ने प्रदेश में शांति व सद्भावना बनाए रखने की भी अपील की है। आरक्षण समर्थकों ने वीजापुर में सफल रैली के बाद सौराष्ट्र व दक्षिण गुजरात में रैली का एलान कर दिया है। उधर आरक्षण आंदोलन के खिलाफ सोशल मीडिया में भी सवाल उठाए जाने लगे हैं।

आंदोलन को कांग्रेस की जातिवादी राजनीति की साजिश बताते हुए कहा जा रहा है कि कांग्रेस प्रदेश में जातिवादी जहर घोल रही है। आंदोलन करने वालों को कांग्रेस का एजेंट बताते हुए लोगों को सचेत किया जा रहा है कि जातिवादी राजनीति के चलते उत्तर प्रदेश व बिहार को कुछ हासिल नहीं हुआ। गुजरात में इस प्रकार की राजनीति को मीडिया भी हवा देने का प्रयास कर रहा है।