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    सिंधी विस्थापित, मर्जर सहित अन्य मामलों पर सरकार खंगाल रही पुराने रिकॉर्ड

    Published: Thu, 15 Mar 2018 04:10 AM (IST) | Updated: Thu, 15 Mar 2018 09:38 AM (IST)
    By: Editorial Team
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    भोपाल। सिंधी विस्थापित की समस्या, मर्जर समस्या व नागरिकता सहित बैरागढ़ सर्किल में जितने भी विवाद हैं, उन्हें सुलझाने के लिए सरकार गंभीर हो गई है। बुधवार को इन मसलों पर जिला प्रशासन से लेकर मंत्रालय के गलियारों में सुबह से रात तक बैठकों का दौर चलता रहा।

    खास बात यह है कि आगामी चुनाव में सिंधियों को साधने के लिए सरकार कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है, इसलिए जो भी विवाद हैं वे चुनाव से पहले ही निपटा लेना चाहती है। इसमें पट्टे देने से लेकर लगाई गई सभी तरह की अघोषित रोक हटाने का निर्णय लिया जा सकता है। इसके लिए कोर्ट केस और वैध दस्तावेज वाली सारी जानकारी जुटाई जा रही है। गुड़ी पड़वा पर इन्हें खुशखबरी सुनाई जा सकती है।

    बता दें कि मर्जर मामला सीएम की घोषणा के पांच साल बाद भी नहीं सुलझ पाया है। सिंधी विस्थापितों को विभाजन के 71 साल बाद भी पट्टे वितरित नहीं किए जा सके हैं। वहीं समय-समय सिंधी विस्थापितों को नागरिकता देने और मैरिज गार्डनों से राहत दिलाने की मांग उठती रही है, लेकिन आज तक इन्हें सुलझाया नहीं जा सका है।

    असमंजस की स्थिति में है सरकार

    प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि लंबे समय से चले आ रहे मामलों को निपटाने के लिए सरकार मंशा तो बना रही है, लेकिन इनकी समस्याओं का निराकरण किस तरह किया जाए इसका कोई सटीक तरीका नहीं निकाल पा रहे हैं। परेशानी ये है कि राजनीतिक दबाव में अगर किसी अधिकारी ने कोई आदेश कर दिया तो उसकी नौकरी खतरे में आ जाएगी। इसलिए बंद कमरों में बैठकें कर जल्द से जल्द सभी समस्याओं को सुलझाने के लिए तैयारियां की जा रही हैं।

    13 गांव का खंगाला जा रहा है रिकॉर्ड

    हुजूर विधायक रामेश्वर शर्मा ने 11 मार्च को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने लिखा है कि उनके विधानसभा क्षेत्र में 13 मर्जर प्रभावित गांव के दो लाख लोग विभिन्न समस्याओं का सामना कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कलेक्टर के आदेश से 24 मार्च 2017 से किसी भी तरह के नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, डायवर्सन, अन्य प्रकरण के अंतरण एवं भूमि के किसी भी प्रकार के स्वरूप परिवर्तन प्रतिबंधित हैं। इसमें बोरबन, बेहटा, हलालपुरा, लाऊखेड़ी, निशातपुरा, शहर भोपाल, शाहपुरा, सेवनियां गौड़, कोटरा सुल्तानाबाद, धरमपुरी, कोहेफिजा, नयापुरा, छोला गांव शामिल हैं। इसलिए कलेक्टर के इस आदेश को निरस्त कर समस्याओं का निराकरण किया जाए।

    इन कोर्ट केसों की जानकारी भी मंगाई

    मंत्रालय में हुई बैठक में मर्जर मामले से जुड़े कोर्ट केस की जानकारी मंगवाई गई। इसमें 16 केस की जानकारी उपलब्ध हो पाई। इसमें से सुप्रीम कोर्ट में दो केस चल रहे थे, जिन पर आर्डर हो चुका है। वहीं हाईकोर्ट में 10 मामले चल रहे हैं, जिसमें से 4 अभी भी लंबित हैं। वहीं 6 केस सिविल कोर्ट में चल रहे हैं। इनकी जानकारी मिलने के बाद आर्डर निकाले जा रहे हैं।

    बैरागढ़ के 3 हजार सिंधी विस्थापितों को पट्टे मिलेंगे

    बैरागढ़ में रहने वाले करीब तीन हजार सिंधी विस्थापितों को पट्टे मिलने की उम्मीद है। कुछ लोगों के पास पुराने पट्टे तो हैं लेकिन उनकी अवधि समाप्त हो गई है। पूज्य सिंधी पंचायत के महासचिव माधु चांदवानी के अनुसार करीब तीन हजार पट्टे लंबित हैंं। वन ट्री हिल्स क्षेत्र के 500 भूखंडों की लीज अवधि समाप्त होने वाली है उनका नवीनीकरण भी नहीं किया जा रहा है। अब लोगों को राजस्व विभाग से उम्मीद बंधी है।

    सिंधु सभा अभिनंदन करेगी

    भारतीय सिंधु सभा ने मर्जर विवाद हल करने एवं पट्टे देने के निर्णय का स्वागत किया है। सभा के राष्ट्रीय महामंत्री भगवानदास सबनानी के अनुसार सीएम ने सिंधु महा सम्मेलन में यह घोषणा की थी। घोषणा पूरी होने पर हम सीएम का नागरिक अभिनंदन करेंगे।

    समिति ने की थी सिफारिश

    सिंधी विस्थापित परिवारों को पट्टे देने के लिए कांग्रेस शासनकाल में सिंधी कल्याण समिति का गठन किया गया था। समिति ने विस्थापितों को कब्जे के आधार पर पट्टे देने की सिफारिश की थी लेकिन प्रशासन विफल रहा। पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने अपने कार्यकाल में मंत्री उमाशंकर गुप्ता की अगुवाई में एक कमेटी का गठन किया था। यह कमेटी भी कोई सार्थक फैसला नहीं कर सकी।

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