ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि । किसी जेबकट के भी पुलिस की हिरासत से भागने के बाद तत्काल एक्शन लेने वाले पुलिस के आला अधिकारी खामौश हैं। उनकी खामौशी भी कई सवालों को जन्म दे रही है। अधिकारी घुसपैठिये के भागने की घटना के 48 घंटे बाद भी जांच प्रतिवेदन का इंतजार कर रहे हैं। इस मामले की जांच एएसपी क्राइम पंकज पांडे कर रहे हैं। अभी उन्होंने जांच प्रतिवेदन एसपी को नहीं सौपा है।

दूसरी तरफ मंगलवार की रात को पुलिस की निगरानी से घुसपैठिये अलमक्की की तलाशने के लिए पुलिस एड़ी चोटी का जोर लगाने के बाद भी उसे पकड़ना तो दूर यह भी पता नहीं लगा पाई है कि वह किस दिशा में भागा है। पुलिस को आशंका है कि अलमक्की कट्टपंथियों के संपर्क आने के बाद उसने ईद से पहले अपने मुल्क पहुंचने के लिए भागने की इसी माह बनाई है।

21 सितंबर 2014 को स्टेशन बजरिया से बांग्लादेशी पासपोर्ट की फोटोकॉपी से सिम कार्ड खरीदते हुए दुकानदार की सतर्कता से पुलिस ने अहमद अलमक्की उर्फ अब्बसर सिद्दकी पुत्र अब्दुल रहमान को पकड़ा था। पुलिस को घुसपैठिए के पास से बांग्लादेश के पासपोर्ट की फोटो कॉपी मिली थी, जबकि वह खुद को मक्का सउदी अरब का मूल निवासी बता रहा था। उसने अपना अस्थाई पता चितगांव ढाका बांग्लादेश बताया था।

लैपटॉप में मिली थी धार्मिक सामग्री -

पुलिस को अलमक्की के पास से बरामद लैपटॉप में धार्मिक सामग्री मिली थी। पुलिस को संदेह था कि अलमक्की किसी जेहादी संगठन से जुड़ा है, लेकिन पुलिस व जांच एजेंसियां यह पता नहीं लगा पाई थीं कि अरबी नागरिक किस इरादे से बांग्लादेश के रास्ते भारत में आया था। पड़ाव थाना पुलिस ने बगैर बीसा के आने व विदेश अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। उसे केवल तीन साल की सजा हुई थी। तीन साल की सजा काटने के बाद उसे जेल से रिहा कर दिया। घुसपैठिए को उसके मुल्क भेजने के लिए पुलिस ने कवायद शुरू की।

प्रदेश में कहीं नहीं हैं अस्थाई डिटेंशन रूम -

विदेशी नागरिक को उसके मुल्क में भेजने के लिए सबसे बड़ा पेच यह आया कि उसे बांग्लादेश का नागरिक माना जाए या फिर सऊदी अरब का। अलमक्की किस देश का नागरिक है, इसका पता लगाने के लिए गृहमंत्रालय के माध्यम से डीएसबी शाखा ने दोनों देशों के दूतावास से संपर्क किया।

नियमानुसार अलमक्की को रखने के लिए अस्थाई डिटेंशन सेंटर में रखा जाना था। पुलिस ने पीएचक्यू से संपर्क कर पता लगाने का प्रयास किया कि विदेशी नागरिक को निगरानी में रखने के लिए डिटेंशन सेंटर कहां हैं? लेकिन जवाब आया कि प्रदेश में इस तरह का डिटेंशन सेंटर कहीं नहीं हैं। आनन-फानन में पड़ाव थाने को ही डिटेंशन सेंटर के रूप में चिन्हित कर उसे मेहमान बनाकर रखा।

रोज मांगता बिरयानी व कबाव-

अलमक्की को पुलिस की निगरानी में रखा गया। एक ट्रेंड घुसपैठिये के भांति उसने अपने व्यवहार से थाने से आधा दर्जन से अधिक जवानों का दिल जीत लिया। और वह उसकी जाने-अंजाने में ख्वाहिश पूरी करने लगा। ख्वाहिश पूरी नहीं होने पर अलमक्की पुलिस अधिकारियों पर दबाव बनाने के लिए खाना-पीना छोड़ देता था। और प्रतिदिन खाने में बिरयानी, चिकन.मटन व कबाव मांगता था। लेकिन एक ही वक्त भोजन करता। और पांचों की वक्त की नमाज का पढ़ता था।

नहीं बताता था घरवालों के संबंध-

2014 में पकड़े जाने के बाद उसने बताया कि उसके अब्बू व अम्मी मक्का में हैं। और चार भाई हैं। उनके नाम भी बताये हैं। लेकिन जेल से छूटने के बाद अपने माता-पिता के संबंध में किसी को कुछ नहीं बताता था। टीआई संतोष सिंह ने उससे घरवालों के संबंध में जानकारी मांगी। लेकिन उसने यह कहकर जानकारी देने से मना कर दिया कि उसके बांग्लादेश की नागरिकता लेने के संबंध में पता चलने पर उसके मुल्क (अरब) के कानून के अनुसार उसके परिवार वालों की परेशानी बढ़ जाएंगीं। और उनका अपने मुल्क में रहना ही मुश्किल हो जाएगा।

कॉल डिटेल मिली-

घुसपैठिया पुलिस की निगरानी में न केवल नेट का उपयोग कर रहा था। बल्कि अपने पास दो-दो मोबाइल रखता था। पड़ताल में इस बात का खुलासा हो गया है कि वह किन-किन लोगों के नाम के सिम का उपयोग कर नेट का उपयोग कर रहा था। हालांकि दो दिन पहले पुलिस ने उसका लैपटॉप रखवा लिया था। पुलिस अधिकारियों को पता लग गया है कि किन-किन लोगों के नाम का सिम का उपयोग किया। और किन-किन लोगों से बात की है। उसने दूसरे मुल्कों में भी बात की है।

आशंका मस्जिद से भागा है अलमक्की-

महलगांव स्थित मस्जिद में नमाज पढ़ाने के लिए जाने वाले सिपाही विजय शंकर राठौर का कहना है कि मस्जिद में नमाज पढ़ाने के बाद उसे वापस थाने ला रहा था। उसने एलआईसी तिराहे के पास टॉयलेट के बाइक रूकवाई। और झाड़ी में जाकर गायब हो गया। लेकिन सिपाही की यह कहानी गले नहीं उतर रही है। क्योंकि सिपाही बाइक से था, और अलमक्की 2 से 3 मिनिट में कैसे गायब हो सकता है। आशंका है कि अलमक्की मस्जिद से गायब हुआ है। सिपाही उसे मस्जिद में छोड़कर इधर-उधर हो गया। और वह गायब हो गया। मस्जिद में वह पूरे सलीके से नमाज पढ़ता था। और किसी के साथ रोज नहीं तोड़ता था। इस मस्जिद में मदरसा भी चलता है। इसमें 60 के लगभग बच्चे तालीम लेने के लिए लाते हैं। और रमजान का महीना होने के कारण छुट्टी चल रहीं हैं।

शहर में पहली बार आने के बाद बहोड़ापुर की मस्जिद में रूका था अलमक्की- शहर में पहली बार आने के बाद अलमक्की बहोड़ापुर स्थित मस्जिद में रूका था। पुलिस को आशंका है कि फर्जी नाम-पते से अलमक्की से पुलिस की नजर से बचने के लिए किसी मस्जिद में पनाह ले सकता है। पुलिस आरोपित को मस्जिदों में संपर्क कर पता लगा रही है। इसके अलावा अल्पसंख्यक बाहुल्य बास्तियों में उसकी पता लगा रही है। पुलिस भी यह पता लगा रही है कि थाने में रहते हुए वह किन-किन लोगों के संपर्क में था।

मस्जिद में किसी कट्टरपंथी संपर्क होने पर भागा है- पुलिस को आशंका है कि किसी कट्टपंथी से मस्जिज में संपर्क होने के बाद अलमक्की ने पुलिस की निगरानी में से भागने को योजना बनाई है। पुलिस पता लगा रही है कि मस्जिद में वह किन-किन लोगों से बात करता था।

लैपटॉप खुलकर पुलिस पता लगा रही कि किन-किन लिंकों पर सर्च करता था- पुलिस ने अलमक्की का लैपटॉप से माथापच्ची कर रही है। पुलिस गुगल की हिस्ट्री खुलकर देख रही है कि वह क्या सर्च करता था।

इन सवालों के जवाबों में उलझी पुलिस-

- किस अधिकारी के इशारे पर नियमों को नजराअंदाज कर विदेशी नागरिकों को सुविधाएं उपलब्ध कराएंगीं।

- क्या अलमक्की निगरानी के लिए जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों व जवानों ने उसे नेट सुविधा व मोबाइल सुविधा उपलब्ध कराने की किसी जिम्मेदार अधिकारी परमिशन ली की नहीं।

- नमाज के लिए मस्जिद ले जाने के लिए किस अधिकारी ने इजाजत दी। और फिर केवल महलगांव की मस्जिद में ही उसे क्यो ले जाया जाता था।

- घुसपैठिये के भागने की 3 दिन में जवाबदारी तय नहीं कर पाई पुलिस अधिकारी। जबकि साफ है कि विदेशी के भागने में बड़े स्तर पर लापरवाही हुई है। और कई जवान संदेह के घेरे में हैं।

जांच प्रतिवेदन मिलने के बाद कार्रवाई होगी-

विदेशी नागरिक के निगरानी में से भागने में कहां चूक हुई, कैसे हुई। इसकी जांच एएसपी क्राइम पंकज पांडे को सौपी गई है। जांच प्रतिवेदन पर आने पर कार्रवाई की जाएगी।

नवनीत भसीन, एसपी