- फायर ब्रिगेड और जेसीबी के साथ नपा का अमला जुटा रहा-

आगर-मालवा। नईदुनिया न्यूज

स्थानीय माधव गौशाला के चारे में 15 फरवरी मध्य रात्रि को आग लग गई। जानकारी लगने के साथ रात 3 बजे गौशाला संचालकों को सूचना लगी। इसी दौरान नपा की फायर ब्रिगेड आ पहुंची। आग पर काबू पाने के लिए 6 घंटे तक फायर मशीन के साथ जेसीबी से मशक्कत करना पड़ी। आग पूरी तरह से 10 घंटे बाद दोपहर 1 बजे बुझाई जा सकी। उसके बाद भी मामूली धुआं शाम तक उठता रहा। जिसे मोटरपंप द्वारा बुझाया जाता रहा। करीब साढ़े 7 लाख रुपए कीमत के डेढ़ लाख घास के पूले जलकर राख हो गए। आधा दर्जन से अधिक बड़े वृक्ष भी आग के लपेटे में आ गए। आसपास की हरियाली भी प्रभावित हुई।

गौशाला अध्यक्ष ओम गोयल व कोषाध्यक्ष रमेश अटल ने बताया कि रात्रिकालीन गश्त के दौरान आग की सूचना पुलिस द्वारा हमें दी गई। हम जब मौके पर पहुंचे तो घास की गंजियों से आग की लपटें 30 - 40 फीट ऊंचाई तक उठ रही थीं। इसी बीच फायर ब्रिगेड मौके पर आ पहुंची किन्तु आग के विकराल रूप के कारण फायर बिेग्रड को भी दूर से पानी चलाना पड़ा। 2 बार फायर ब्रिगेड से पानी डालने के बाद लपटें कम हुईं। इसी बीच नगर पालिका से दो पानी के टैंकर तथा जेसीबी भी आ पहुंची। जेसीबी से घास की गंजियों को बिखेरा गया और साथ में पानी डाला गया। यह मशक्कत करीब 6 घंटे तक लगातार की गई। तब जाकर आग पर काबू पाया जा सका। उसके बाद भी दोपहर तक फायर ब्रिगेड व पानी के टैंकरों से आग बुझाने का काम दोपहर 1 बजे तक जारी रहा। इसके बाद भी मामूली धुआं शाम तक फैले हुए चारे से भी उठता रहा। नगर पालिका ने समीपस्थ वाटर वर्क्स से पाइप लाइन के माध्यम से पानी छुड़वाया।

तहसीलदार ने किया मुआयना

गौशाला संचालकों के अनुसार करीब डेढ़ लाख पूले गौशाला से करीब 400 मीटर दूरी पर मुख्य जलप्रदाय केन्द्र के समीप एक बाड़े में जमा रखे थे। प्रातः तहसीलदार मुकेश सोनी एवं पटवारी पटवारी मौके पर आए और मुआयना किया। पंचनामा बनाया। थाने पर भी गौशाला की ओर से इस अग्नि दुर्घटना और इसमें हुई नुकसानी की जानकारी दी जा चुकी है।

लोगो का हुजूम लगा रहा

दुर्घटना स्थल कमलकुंडी के अचलेश्वर महादेव के पास होकर बड़ातालाब मार्ग पर है। इधर आग से उठने वाला धुआं समीपस्थ बस्तियों से लेकर शहर के सरकारबाड़ा बाजार क्षेत्र तक फैल गया था। जिसे देख ऐन सुबह से लोगों का हुजूम घटनास्थल पर पहुंचा। यह तांता दिनभर लगा रहा। गनीमत है कि आग लगने के स्थान के आसपास बस्ती क्षेत्र नहीं है।