मनीष पाराशर, इंदौर। सावधान इंडिया! अगर आप स्वतंत्रता दिवस पर मिलने वाली महाबचत के ऑफर की ओर तांक रहे हैं तो अलर्ट हो जाएं। त्योहार के चलते ऑनलाइन शॉपिंग में भारी छूट के नाम पर भेजे जा रहे मैसेज आपको भ्रमित भी कर सकते हैं। खरीदारी पर भारी छूट के मैसेज हों या स्क्रीन को अनलॉक करने के लिए आपसे अंगूठे के निशान मांगे जाने वाले मैसेज। जरूरी नहीं वह सही हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर थंब इंप्रेशन (अंगूठे के निशान) लेने के लिए मैसेज किए जा रहे हैं। यह पूरी तरह फर्जी हैं। स्वतंत्रता दिवस के चलते मिलने वाले ऑफर्स को लेकर साइबर सेल व क्राइम ब्रांच ने एडवाइजरी (सलाह) जारी की है। इनमें जनता को अलर्ट किया है कि त्योहारों पर हैकर्स सक्रिय रहते हैं। वे लालच देकर आपको फेक लिंक शेयर करेंगे। उस पर क्लिक करने पर आपके साथ ठगी हो सकती है।

शहर की क्राइम ब्रांच या साइबर सेल लगातार ऑनलाइन ठगी की घटनाओं पर नजर रखे हुए है। समय-समय पर वह जनता को अलर्ट रहने के लिए सूचना भी देते हैं। स्वतंत्रता दिवस पर छोटी से लेकर बड़ी कंपनियां जनता को लुभावने ऑफर दे रही हैं। सोशल मीडिया हो या मोबाइल पर आने वाले टैक्स्ट मैसेज। सभी जगह ऑफर्स के विज्ञापन दिए जा रहे हैं। हाल ही में स्वतंत्रता दिवस पर 70 से 80 प्रतिशत लोगों तक वाट्सएप पर थंब इंप्रेशन वाला मैसेज पहुंचा है।

इस तरह के मैसेज को लेकर क्राइम ब्रांच एएसपी अमरेंद्र सिंह ने बताया कि ये मैसेज पूरी तरह फर्जी हैं। हैकर्स ऑफर्स के नाम पर जनता को लालच देंगे, लिंक भेजेंगे। स्क्रीन अनलॉक करने के लिए आपसे थंब इंप्रेशन मांगेंगे। यह वह थंब इंप्रेशन है जिसकी मदद से आप बायोमैट्रिक से लिंक हैं। आपका सारा डाटा चाहे वह आधार कार्ड हो या पैन कार्ड, या बैंक अकाउंट की जानकारी, सभी हैकर्स तक पहुंच सकती है। उसके बाद हैकर्स इनका गलत उपयोग कर आपको क्रिमिनल बना सकता है। ऐसी लिंक पर क्लिक न करें जिससे आप खुद परेशानी में पड़ जाएं।

आधार कार्ड बनाने वाली कंपनी भी कर चुकी है अलर्ट

आधार कार्ड बनाने वाली कंपनी यूआईडीएआई ने भी एक सप्ताह पहले एडवाइजरी जारी कर लोगों को जागरूक रहने की सलाह दी है। उसने जिक्र किया है कि हस्तरेखा या फिंगर पिं्रट वाले ऐसे एप का इस्तेमाल न करें। हैकर्स सक्रिय हैं। आपके फिंगर प्रिंट या अंगूठे के निशान का दुरुपयोग किया जा सकता है। साइबर सेल की टीम भी स्वतंत्रता दिवस पर अलर्ट है। साइबर सेल एसपी जितेंद्र सिंह का कहना है कि लोग व्यस्तता और ऑफर्स के चलते ऑनलाइन साइट्स से खरीदारी करते हैं।

जल्दबाजी में वे साइट्स असली है या नकली, यह भी नहीं देख पाते। सालभर में ऐसे 120 केस सामने आए हैं जिनमें पीड़ित फेक लिंक के माध्यम से ठगी के शिकार हो चुके हैं। उन्हें पता ही नहीं चला और न ही उनके मोबाइल पर ओटीपी नंबर पहुंचा। हैकर्स ने उनके खातों से लाखों रुपए की शॉपिंग कर डाली। इसका कारण इंटरनेट पर आधे से ज्यादा शॉपिंग साइट्स का वेरिफाइड न होना है।

ऐसे करें अनवेरिफाइड साइट्स की पहचान

- साइट खोलते ही लिंक में आने वाले शब्दों को जांच लें।

- जिन साइट के शुरुआती में ही राॉज होता है, वे साइट्स वेरिफाइड होती हैं।

- वेरिफाइड साइट्स में पीले रंग का लॉक भी होता है।

- बिना एस वाली साइट्स अनवेरिफाइड होती है। ऐसी साइट्स में धोखाधड़ी की संभावना होती है।

(साइबर एक्सपर्ट के अनुसार)

ऐसे बचें ठगी से

- साइट्स पर ऑर्डर करने से पहले उसका पता व मोबाइल नंबर जांच लें।

- लैंडलाइन नंबर है तो उस पर कॉल कर चेक कर लें।

- कैश ऑन डिलीवरी का ऑप्शन चुनें।

- हाल ही में कुछ कंपनियों ने यह भी रियायत दी है कि ग्राहक के पास जब प्रोडक्ट पहुंचे तो वह उसके पैकेट को खोलकर देखे। यदि संतुष्ट हो तो ले अन्यथा बदल दे।

- अनचाही लिंक पर क्लिक न करें।

- अगर कोई लिंक थंब इंप्रेशन मांगे तो उस पर फिंगर प्रिंट न दें।