ग्वालियर। विशेष सत्र न्यायालय ने शुक्रवार को हिरण्य वन कोठी में 35 साल पहले हुई लूट व डकैती के मामले में साक्ष्यों के अभाव में सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। इस मामले के 5 आरोपियों की मौत हो चुकी है। घटना के चश्मदीद गवाहों का निधन हो गया था।

परिवादी चित्रलेखा आंग्रे भी वारंट भेजने के बाद गवाही के लिए कोर्ट नहीं आई। कोर्ट में जो गवाह गवाही देने पहुंचे, उन्होंने डकैती की कहानी का समर्थन नहीं किया। कोर्ट के सामने ऐसा कोई साक्ष्य नहीं आ, जिससे साबित हो सके कि कोठी में लूट व डकैती हुई थी। कोर्ट को आरोपी का बचाव पक्ष जानने की की जरूरत नहीं पड़ी और फैसला सुनाया।

दोषमुक्त का फैसला सुनकर आरोपी मुस्कराए और जज से बोले हमें ईश्वर पर भरोसा था। जज ने कहा कि आप अपराध से मुक्त हो गए। जब मामला दर्ज किया गया था, उस वक्त सभी आरोपी जवान थे और कोर्ट का फैसला आने तक सभी सीनियर सिटीजन हो गए। आरोपियों की ओर से अधिवक्ता मुकेश गुप्ता, अभिषेक शर्मा अन्य वकीलों ने की। अभियोजन की ओर से अपर लोक अभियोजक जागेश्वर भदौरिया ने की।

वर्ष 1983 में आरोपित पहुंचे थे कोठी में डकैती डालने

सरदार आंग्रे राजमाता विजय राजे सिंधिया के निज सचिव थे। राजमाता ने वर्ष 1973 में सरदार आंग्रे को यह कोठी रहने के लिए दी थी। वर्ष 1979 में एक किराया नामा भी संपादित किया गया था, लेकिन 15 लोगों ने 13 अगस्त 1983 को 5 से 6 बजे के बीच कोठी पर हमला बोल दिया। चौकीदार को भगा दिया। कोठी में लूट व डकैती की।

माधवराव सिंधिया सहित 16 लोगों के खिलाफ झांसी रोड थाने में आवेदन दिया, लेकिन केस दर्ज नहीं किया गया। इसके बाद जिला कोर्ट में चित्रलेखा आंग्रे ने परिवाद दायर किया। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना कि घटना हुई है। परिवाद को संज्ञान में लेते हु कोर्ट ने माधवराव सिंधिया सहित 16 कांग्रेस के नाताओं पर लूट व डकैती का केस दर्ज किया। इसके बाद यह केस हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में चला, जिसके चलते समय पर ट्रायल नहीं हो सकी। हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट से निराकरण होने के बाद विशेष सत्र न्यायालय में ट्रायल शुरू हुई।

36 में 5 गवाह कोर्ट में गवाही देने पहुंचे, जिसमें से प्रमुख गवाहों की मौत चुकी थी। कुछ ऐसे गवाह थे, जो मिले नहीं। चित्रलेखा के परिवाद से केस दर्ज हुआ था, लेकिन ये गवाही के लिए कोर्ट नहीं आईं।

एक दिन में 7 गवाह कोर्ट ने बुलाए थे।

चश्मदीद गवाहों का हो चुका है निधन

इस केस में राजमाता विजयराजे सिंधिया, नारायण कृष्ण शेजवलकर, सरदार संभाजी राव आंग्रे, माधव इंदापुरकर, शीतला सहाय, गंगाराम बांदिल घटना के प्रमुख गवाह थे। इनके सामने पूरा घटनाक्रम हुआ था। लेकिन इनका निधन हो चुका था। 36 में से 5 गवाह कोर्ट में गवाही देने पहुंचे थे। इन गवाहों ने घटना का समर्थन नहीं किया।

इन आरोपितों का हो चुका है निधन

हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट तक केस चलने की वजह से ट्रायल कोर्ट में कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। 35 साल देर से ट्रायल शुरू होने से माधवराव सिंधिया, चंद्रकांत मांडरे, महेन्द्र प्रताप सिंह, नरेन्द्र सिंह, शरद शुक्ला का निधन हो चुका है।

ये कांग्रेस नेता हुए दोषमुक्त

पूर्व मंत्री केपी सिंह, अशोक शर्मा, अरुण तोमर, रवीन्द्र भदौरिया, एम राजे भौंसले, बाल खांडे, राजेन्द्र सिंह तोमर, श्रीराम भार्गव, उदयवीर सिंह, रमेश शर्मा, विलास लाड को कोर्ट ने दोषमुक्त कर दिया।