ग्वालियर। फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी यानि आमला यानि आंवला एकादशी व रंगभरी एकादशी के रूप में मनाया गया। इस एकादशी में भक्त आंवला के वृक्ष की पूजा कर भगवान श्रीहरि विष्णु एवं माता महालक्ष्मी का व्रत रखते हैं। वहीं मान्यता है कि रंगभरी एकादशी के दिन ही भगवान शिव माता पार्वती का गौना कराकर काशी आए थे। वाराणसी एवं काशी में रंगभरी एकादशी का पर्व बहुत धूमधाम से मनाया जाता है।

पुष्य नक्षत्र में इस बार आंवला एवं रंगभरी एकादशी मनाई गई। मान्यता के अनुसार पुष्य नक्षत्र में आंवला एकादशी का व्रत व विधिविधान से पूजन करने से भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी की कृपा भक्तों को प्राप्त होती है। आंवला एकादशी को आमलकी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।

रविवार को भक्तों ने सुबह उठाकर भगवान सूर्य की पूजा कर भगवान श्रीहरि विष्णु एवं माता महालक्ष्मी का व्रत रखा। वहीं कई भक्तों ने रंगभरी एकादशी के रूप में भी इस पर्व को मनाया। मान्यता है कि रंगभरी एकादशी को भगवान शिव माता पर्वती का गौना कराकर लाए थे। इस दिन काशी में गुलाल से होली मनाई जाती है। इसके कारण इसे रंगभरी होली कहते हैं।

पर्यावरण का संरक्षण ही है हिंदू धर्म

ज्योतिषाचार्य पं. सतीश सोनी के अनुसार आंवला एकादशी में व्रत व पूजन करने से भक्तों को एक हजार गौदान के बराबर फल मिलता है। वहीं पर्यावरणविद्ध एवं वैद्य वेदपाल झा के अनुसार आंवला का व्रत होली के पूर्व गर्मियों के प्रारंभ में मनाया जाता है। इस समय आंवला के पेड़ में फूल आना प्रारंभ हो जाता है। यह फूल गर्मियों भर रहता है और बारिश के मौसम में फल आना प्रारंभ हो जाते हैं जो कि सर्दियों तक पूरी तरह से पक जाते हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार आंवला के पौधे को भगवान विष्णु ने ब्रम्हाजी के साथ ही आंवले के पौधे को जन्म दिया था। इसलिए इसका धर्मग्रंथों में महत्व दिया गया है। वहीं पर्यावरणविद्ध व आरएसएस के प्रचारक वेदपाल झा का कहना है कि चूंकि हिंदू धर्म पर्यावरण के साथ जीवन जीने की शिक्षा देता है। इसलिए जो भी पर्यावरण के लिए जरूरी है उसे धर्म में स्थान दिया गया है।

पेड़ पौधों और नदियों के साथ जानवरों को धर्म में स्थान देकर उनके संरक्षण के लिए कहा गया है। उनका कहना है कि जो व्यक्ति आंवल के पेड़ की पूजा करेगा और व्रत रखेगा वह साल भर इसका संरक्षण भी करेगा। साथ ही उसे इसके उपयोग के बारे में भी जानकारी रखेगा। क्योंकि आयुर्वेद में आंवले को काफी उपयोगी माना जाता है। वेदपाल झा के अनुसार आंवले में एंट्री ऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं। जो कि कैंसर से बचाव करते हैं।

आंवला का जूस पेप्टिक अल्सर में काफी फायदेमंद है। साथ ही यह अल्सर की रोकथाम भी करता है। आंवला का उपयोग शरीर का वजन कम करने में भी किया जाता है। आंवला शरीर में मौजूद गंदगी को साफ करता है। आंवला हाईब्लड़ प्रेशर में भी कारगर साबित होता है। साथ ही आंख की रोशनी को भी यह ठीक रखता है।