जबलपुर। सुरक्षा संस्थान 506 आर्मी बेस वर्कशॉप के लेफ्टिनेंट कर्नल के माध्यम से सेना के गोपनीय दस्तावेज लीक हुए हैं। सेंट्रल कमांड लखनऊ ने इसकी पुष्टि कर दी है। साथ ही कहा है कि मिलिट्री इंटेलीजेंस इस मामले में पता लगा रही है कि लेफ्टिनेंट कर्नल ने यह कृत्य अंजाने में या जानबूझकर किया है। वहीं आर्मी बेस वर्कशॉप के संदेही लेफ्टिनेंट कर्नल ने गुरुवार से ड्यूटी ज्वाइन कर ली है।

लखनऊ सैन्य प्रशासन की ओर से पीआरओ ने माना कि लेफ्टिनेंट कर्नल के आईटी उपकरणों (कम्प्यूटर) से सूचना लीक हुई है। सेना ने 12 फरवरी को मिलिट्री इंटेलीजेंस को इस मामले की जांच का दायित्व सौंप दिया है। मामले की प्रारंभिक जांच में लेफ्टिनेंट कर्नल के ऑफिस में मौजूद कम्प्यूटर और दस्तावेजों की छानबीन की गई।

इस दौरान इंटेलीजेंस ने लेफ्टिनेंट कर्नल से पूछताछ भी की। बावजूद इसके यह तय नहीं हो सका कि लेफ्टिनेंट कर्नल ने यह कृत्य अंजाने में या जानबूझकर किया है। मिलिट्री इंटेलीजेंस इस मामले में आगे की जांच लगातार जारी रखेगी।

हार्डडिस्क फोरेंसिक जांच

लेफ्टिनेंट कर्नल के कम्प्यूटर की हार्डडिस्क और मोबाइल जब्त कर लिया गया है। उक्त इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों को फोरेंसिक विश्लेषण (जांच) के लिए भेजा गया है। जांच के बाद यह साफ हो जाएगा कि लेफ्टिनेंट कर्नल ने कब, कहां और किसे गोपनीय दस्तावेज भेजे हैं? वर्तमान में वह दस्तावेज कहां हैं?

हनी ट्रैपिंग का मामला नहीं

सैन्य प्रशासन ने आर्मी बेस वर्कशॉप के लेफ्टिनेंट कर्नल की भूमिका को लेकर हनी ट्रैपिंग की चर्चाओं को अफवाह बताया है। ले. कर्नल के बैंक खाते में बड़ी राशि जमा होने की बात भी मिलिट्री इंटेलीजेंस ने सटीक या प्रमाणित नहीं पाई है।

इनका कहना है

इस मामले में जांच चल रही है। कुछ भी कहना जल्दबाजी होगा। हनी ट्रैपिंग या मनी ट्रांसफर के अब तक कोई प्रमाण नहीं मिले हैं।

-गार्गी मलिक सिन्हा, पीआरओ डिफेंस, लखनऊ