महू। छावनी में जासूसी के आरोप में पकड़े गए बिहार रेजिमेंट के नायक अविनाश कुमार को जांच एजेंसियों के अधिकारियों ने बिना किसी पूर्व सूचना के पकड़ा था। इसके बारे में कोई जानकारी न तो स्थानीय सैन्य अधिकारियों और न ही पुलिस अधिकारियों को थी। ऐसे में सेना से जुड़े लोग उसके अपहरण की शिकायत लिखवाने थाने पहुंचे थे। जब पुलिस ने विभाग के उच्चाधिकारियों से संपर्क किया तो पता चला कि उसे जांच एजेंसियां ले गई हैं। महू टीआई अभय नेमा ने बताया कि 15 मई को केंद्रीय जांच एजेंसी और एटीएस भोपाल की एक टीम महू पहुंची और सेना के रिहायशी क्वार्टर के बाहर गाड़ी में अविनाश का इंतजार करने लगी। जैसे ही अविनाश बाहर आया, अधिकारी उसे ले गए। फिर उनके पास अविनाश के अपहरण की शिकायत आई, जिसके बाद जांच की गई।

सोशल मीडिया पर साझा करता था जानकारी

अविनाश की पहुंच गुप्त विभागों तक भी थी। वह सैन्य टुकड़ियों की गतिविधियों की जानकारी भी सोशल मीडिया पर साझा करता था। सूत्रों के मुताबिक सैन्य संस्थानों से जुड़े या उनके लिए सेवा देने वाले दूसरे कई विभागों के सिविल अधिकारियों-कर्मचारियों पर भी जांच एजेंसियों की नजर है।

एक्सपर्ट व्यू

हनी ट्रैप से बचना जरूर

सैन्य संस्थानों के अधिकारियों के लिए भी हनी ट्रैपिंग एक बड़ा सिरदर्द है। हालांकि सेना में इससे बचने के लिए पूरा प्रशिक्षण दिया जाता है, लेकिन नौजवान कर्मचारी इस तरह के जाल में फंस जाते हैं। प्रशिक्षण के अलावा कर्मचारियों को खुद भी जागरूक रहने की जरूरत है। सेना से जुड़े अधिकारियों-कर्मचारियों के परिजन को भी ध्यान रखना चाहिए कि वे वर्चुअल वर्ल्ड में किस तरह के लोगों से दोस्ती कर रहे हैं। इस मामले में अविनाश कुमार नसमझी का शिकार हो गए। एक संवेदनशील सेवा में होने के कारण उन्हें इस बारे में सतर्क रहना चाहिए था।

- निखिल दीवानजी, रिटायर्ड कर्नल