- अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का समापन, स्मारिका का विमोचन

संत हिरदाराम नगर। नवदुनिया प्रतिनिधि

योग और प्राकृतिक चिकित्सा ही स्वस्थ रहने की सबसे कारगर पद्घति है। योग हमारे ऋ षि मुनियों की देन है जो हमें विरासत में मिली है। यह आज भी उपयोगी है। श्रीसंत प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग संस्थान की ओर से प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग पर केंद्रित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के सामपन सत्र में वक्ताओं ने यह बात कही।

वियतनाम से आए डॉ. आशीष त्रिपाठी ने होलो योग पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि योग की मदद से हम निरोगी रह सकते हैं। डॉ. एचएस वाडिराजा ने कैंसर जैसे गंभीर रोग के निदान में योग के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि योग कई बीमारियों से बचाव में कारगर है। अंतिम सत्र में फिलिपिंस से आई डॉ. मैरी जीन ने तनाव से बचाव कैसे किया जाए इस पर रोशनी डाली।

लखानी ने किया स्मारिका का विमोचन

सम्मेलन के दौरान हांगकांग से आए अप्रवासी भारतीय समाजसेवी दादा कान लखानी ने सम्मेलन पर केंद्रित स्मारिका का विमोचन किया। इस मौके पर जीव सेवा संस्थान के सचिव महेश दयारामानी सहित अनेक लोग उपस्थित थे। सम्मेलन के समापन समारोह में अतिथियों का संत सिद्घभाऊ ने सम्मान किया। कार्यक्रम संत हिरदाराम आडिटोरियम में हुआ।

फोटो- स्मारिका का विमोचन करते दादा कान लखानी।

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