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    सबने जानी पीएम के मन की बात पर किसी नहीं समझी तुषार के मन की बात

    Published: Wed, 18 Apr 2018 01:16 AM (IST) | Updated: Wed, 18 Apr 2018 01:16 AM (IST)
    By: Editorial Team

    17 बीजीटी- 59अपने परिजनों के साथ तुषार उराड़े।

    बालाघाट (नईदुनिया प्रतिनिधि)।

    26 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में तुषार उराड़े को स्वच्छता का प्रेरक कहा तो यह न केवल मीडिया की सुर्खियों में आया बल्कि प्रशासन और सामाजिक संगठनों ने भी इसकी सुध लेनी शुरू कर दी। एसबीआई ने उपहार में एक साइकिल दी और नगर पालिका ने अपना ब्रांड एम्बेसडर घोषित कर दिया। यह सब भी उसके लिए कम नहीं था, लेकिन तुषार के लिए वह जो चाहता हैं, नहीं था। यहां सभी ने मोदी के मन की बात तो जानी है, लेकिन तुषार के मन की बात किसी ने नहीं समझी है। स्वच्छता का प्रेरक तुषार उराड़े भी आम बच्चों की तरह बोलना चाहता है।

    जिस बेटे की निशक्तता से पिता में असंतोष था, उसकी सूझबूझ से गांव में हुए बदलाव और उसे मिल रहे सम्मान से अब वह गौरव महसूस कर रहे हैं। इसके लिए उन्होंने प्रांरभिक कोशिश तो की, लेकिन अपनी जमा पूंजी खोकर भी जब वह ठीक नहीं हुआ तो निराश होकर बैठ गए। तुषार के पिता संतोष उराड़े की उम्मीद फिर जाग गई है। अब वह उसका हर संभव इलाज कराने की बात कह रहे हैं। उन्होंने नईदुनिया से बातचीत में बताया है कि डॉक्टरों का कहना है वह बोल सकता है और सुन सकता है। लेकिन महंगे इलाज के आगे वह हार कर बैठ गए थे।

    बेटा अच्छी शिक्षा हासिल कर आत्मनिर्भर बने

    तुषार के पिता संतोष का कहना है कि वह गरीब किसान है। जमा पूंजी और पत्नी के जेवर सब उसके इलाज में खो दिए, थोड़ी से जमीन है, जिससे गुजारा चल रहा है। बेटा अच्छी शिक्षा हासिल कर आत्मनिर्भर बने यही आखिरी उम्मीद है। पहले जरूर उसकी तकलीफ को लेकर पेरशान थे, लेकिन अब उन्हें उसकी समझ और सूझबूझ से उसका भविष्य उज्जवल दिख रहा है। जिसके चलते संतोष, तुषार को बड़े स्कूल में पढ़ाने के लिए शासन से मदद की गुहार लगा रहा।

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