सेंधवा (बड़वानी), नईदुनिया प्रतिनिधि। Barwani News : शहर के किला परिसर में मंगलवार सुबह एक वृद्ध तालाब में डूब गया। वह बचने के लिए हाथ - पैर मारता रहा, छटपटाता रहा और वहां मौजूद लोग उसे बचाने के बजाय मोबाइल से वीडियो बनाते रहे। हालांकि कुछ लोगों ने चीखकर उसे किले की दीवार की ओर जाने को कहा, लेकिन कुछ ही देर बाद वह तालाब में समा गया। उसकी मौत हो गई। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है।

शहर के खलवाड़ी मोहल्ला निवासी श्रावण (60) पिता चिंदू चौधरी की कि ला परिसर स्थित राजराजेश्वर मंदिर के सामने वाले तालाब में डूबने से मौत हो गई। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामला जांच में लिया है। मृतक ट्रक चालक था। फिलहाल पुलिस को जानकारी नहीं मिल पाई है कि श्रावण चौधरी किले की दीवार से खुद कूदा या गिरा। आशंका कूदने की जताई जा रही है। उसे देख एक महिला ने चिल्लापुकार की।

मंदिर दर्शन करने आए शहर निवासी अतुल राठौड़ ने बताया कि एक महिला द्वारा चिल्ला-चिल्ला कर कहा जा रहा था कि कोई तालाब में कूद गया है। सूचना पर डायल-100 मौके पर पहुंची। जानकारी मिलते ही शहर पुलिस थाना प्रभारी राजूसिंह बघेल मौके पर पहुंचे।

तब तक वृद्ध पानी में डूब चुका था। उसका सिर पानी के ऊपर दिखाई दे रहा था। शव को तालाब से निकालने के लिए शहर पुलिस थाने के एएसआई पूरणसिंह मंडलोई खुद रस्सी लेकर तालाब में कूदे। शहर थाना प्रभारी बघेल भी तालाब में उतरे। एएसआई मंडलोई ने शव को रस्सी बांधी। इसके बाद शव को खींचकर बाहर निकाला गया। सूचना पर सीएमओ मधु चौधरी भी मौके पर अमले के साथ पहुंचे थे।

टैक्टर में रखा शव, बाद में पिकअप से ले गए

शव को तालाब से निकालने के बाद ट्रैक्टर ट्रॉली में रखा गया। बाद में कु छ लोगों के ऐतराज पर उसे पिकअप में रखा गया। सिविल अस्पताल में पीएम के बाद शव परिजन के सुपुर्द कि या गया। परिजन के मुताबिक मृतक श्रावण चौधरी सुबह घर पर नाश्ता करके बाजार निकले थे। उनके दो पुत्र राके श और दिनेश काम से महाराष्ट्र गए हुए थे। दोनों कारीगर हैं। पत्नी की आठ साल पहले मौत हो गई थी।

शव वाहन के अभाव में होती है परेशानी

शासकीय सिविल अस्पताल में शव वाहन नहीं है। शव वाहन के अभाव में सबसे ज्यादा परेशानी ग्रामीण क्षेत्र के आर्थिक रूप से कमजोर ग्रामीण परिवारों को होती है। सिविल अस्पताल में इलाज के दौरान या कि सी हादसे में कि सी गरीब परिवार के व्यक्ति की मृत्यु होने पर शव को घर या गांव तक ले जाने के लिए परिजन को कि राए से ट्रैक्टर ट्रॉली या अन्य वाहन का सहारा लेना पड़ता है। सिविल अस्पताल में 114 ग्राम पंचायत और 154 गांवों के दूरदराज से भी गंभीर मरीज आते हैं। दुर्घटना में घायल मरीज भी यहां लाए जाते हैं। कई बार उपचार के दौरान मरीज की असमय मौत हो जाती है। ऐसे में परिजन के सामने शव को अंत्येष्टि के लिए वापस घर तक ले जाने की सबसे बड़ी परेशानी होती है। आर्थिक तौर पर संपन्न परिवार कि राए का वाहन कर शव को अपने घर तक ले जाते हैं, लेकि न गरीब परिवारों से संबंध रखने वाले लोगों के पास सिवाय व्यवस्था और अपनी कि स्मत को कोसने के अलाव कोई विकल्प नहीं रह जाता है। बीएमओ डॉ. जेपी पंडित ने का कहना है कि शव वाहन की मांग को लेकर कई बार वरिष्ठ अफसरों और विभाग को पत्र लिखे गए हैं। लेकि न अभी तक शव वाहन की सुविधा नहीं मिल पाई है।

जांच जारी

शहर पुलिस थाना प्रभारी राजूसिंह बघेल ने बताया कि तालाब में डूबने से शहर निवासी वृद्ध की मौत हो गई है। वह स्वयं किले के ऊपर से कू दा है या गिरा है, इसकी जांच की जा रही है। फिलहाल मर्ग कायम कर मामला जांच में लिया है।