ग्वालियर। नईदुनिया प्रतिनिधि

विशेष सत्र न्यायाधीश रामजी गुप्ता ने 4 हजार की रिश्वत लेने वाले करहिया थाने के तत्कालीन एएसआई मेवाराम उदवंशी को चार साल की सजा सुनाई है और 1 हजार रुपए का अर्थदंड लगाया है। कोर्ट ने आरोपित को जेल भेज दिया है।

23 जून 2014 को रिछारी कला निवासी कमल सिंह जाटव ने लोकायुक्त पुलिस के पास एक शिकायत दर्ज कराई। उसने अपनी शिकायत में बताया कि करहिया थाने में कोक सिंह ने उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ मारपीट की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। कमल सिंह व उसकी पत्नी की तो पुलिस ने जमानत ले ली है, लेकिन उसके पुत्र व केके चौरसिया की जमानत होनी है। जब कमल सिंह एएसआई मेवाराम से मिला तो उसने 10 हजार रुपए की रिश्वत मांगी। कमल सिंह ने लोकायुक्त को बताया कि उसे रिश्वत देना नहीं चाहता हूं। एएसआई मेवाराम को रंगे हाथ पकड़वाना चाहता हूं। लोकायुक्त ने उसे एक टैप रिकार्डर दिया। कमल सिंह व मेवाराम के बीच हुई रिश्वत की वार्ता रिकार्ड हो गई। इसके बाद मेवाराम को रंगे हाथ रिश्वत लेने पकड़ने के लिए लोकायुक्त पुलिस ने जाल बिछाया। 25 जून 2014 को एएसआई मेवाराम को 4 हजार की रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया। लोकायुक्त ने जांच के बाद कोर्ट में चलान पेश किया। लोकायुक्त पुलिस के विशेष लोक अभियोजक अरविंद श्रीवास्तव ने तर्क दिया कि आरोपित ने गंभीर अपराध किया है। क्योंकि समाज भ्रष्टाचार से परेशान है। अगर आरोपित को कड़ी सजा नहीं दी जाती है तो समाज में गलत संदेश जाएगा। आरोपित ने बचाव में कहा कि उसे झूठा फंसाया गया है। उसके खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मेवाराम को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत चार साल की सजा सुनाई और उसे जेल भेज दिया।