ग्वालियर। नईदुनिया प्रतिनिधि

अपर सत्र न्यायालय ने चार आरोपियों को यह कहते हुए पांच-पाच साल की सजा सुनाई है कि अपराध की प्रकृति गंभीर है। इनके प्रति उदारता नहीं बरती जा सकती है। साथ ही 2-2 हजार रुपए का अर्थदंड लगाया है। वहीं दो आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया।

अपर लोक अभियोजक पुनीत कोहली ने बताया कि 10 जनवरी 2014 को भवनपुरा में नब्बा, बनवारी, ख्यालीराम, सुघर सिंह ने एक राय होकर रामअवतार व भूरे पर हमला कर दिया। रामअवतार व भूरे को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। फरसा व लाठी से हमला कर दोनों को घायल कर दिया। रामअवतार को गंभीर चोटें आईं। हस्तिनापुर थाने में 6 लोगों को खिलाफ केस दर्ज कराया। अपर सत्र न्यायालय में ट्रायल चली। आरोपियों की ओर से बचाव में तर्क दिया कि सभी आपस में भाई हैं। पूरा परिवार चारों की कमाई पर निर्भर है, इसलिए दंड देने में रहम बरती जाए। अपर लोक अभियोजक पुनीत कोहली ने तर्क दिया कि आरोपितों ने गंभीर घटना को अंजाम दिया है। गांव में दो लोगों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा था। इससे गांव में दहशत फैल गई थी। अगर आरोपियों के प्रति उदार रुख अपनाया जाता है तो समाज में गलत संदेश जाएगा। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने नब्बा, बनवारी, ख्यालीराम, सुघर सिंह को 5-5 साल की सजा सुनाई है। जबकि अन्य दो आरोपियों को साक्ष्य अभाव में दोषमुक्त कर दिया है।