ग्वालियर। नईदुनिया प्रतिनिधि

पलंग पर बेडशीट नहीं है, मरीज के लेटने के पहले बेडशीट बिछ जाना चाहिए। तुम तो हमें देखकर बिछा रही हो। अब दिखावा नहीं चलेगा, सुधर जाओ, नहीं तो हमें एक्शन लेना पड़ेगा। आपके यहां दरवाजे के पीछे गंदी बेडशीट पड़ी है, हर तरफ गंदगी है। यहां पर कब से सफाई नहीं हुई। आप सफाई सुपरवाइजर हैं, राउंड लेकर क्या देखते हैं। आपको गंदगी दिखाई नहीं देती।

यह बात जीआर मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. भरत जैन एवं जेएएच अधीक्षक डॉ. अशोक मिश्रा ने शनिवार सुबह ट्रामा सेंटर के निरीक्षण के दौरान कही। डीन ने सफाई कर्मचारी से पूछा- फिनाइल किस रंग की होती है, जब तुम्हे रंग ही नहीं पता तो फिनाइल का क्या पौंछा लगाते होगे। मैं यहीं खड़ा हूं, मेरे सामने सफाई करो। ट्रामा सेंटर के बाहर खाली जगह पर पार्किंग बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। सफाई कार्य शनिवार को चलता हुआ मिला।

परिजन स्ट्रेचर धकेलकर नहीं ले जाएंगेः

डीन एवं अधीक्षक ने रेडक्रास व कैजुअल्टी के स्टाफ से स्ट्रेचर की जानकारी मांगी। स्टाफ ने बताया, 7 स्ट्रेचर और 3 व्हील चेयर हैं, जबकि डिमांड 100 स्ट्रेचर की थी। डीन ने आदेश दिए कि मरीज को परिजन नहीं हमारा स्टाफ अंदर लेकर जाएगा। रेडक्रास के कर्मचारियों ने इसके लिए 10 कर्मचारियों की आवश्यकता बताई। इस पर डीन एवं अधीक्षक ने कहा- हम आपको आदमी और स्ट्रेचर भी देंगे। मगर ध्यान रहे एम्बुलेंस आते ही कर्मचारी मरीज को अटेण्ड करेगा।

गाड़ी गैलरी में क्यों खड़ी हैः

डीन को कैजुअल्टी में गाड़ियां रखी मिलीं। जब पूछताछ हुई तो कोई बताने को तैयार नहीं था। इस पर अधीक्षक ने कहा कि गाड़ियों की हवा निकाल दो। इसके बाद लोगों ने बताया कि गाड़ी डॉ. मुलायम की है। डॉक्टर से जब जवाब तलब किया तो वे बोले गाड़ी चोरी हो जाती है, जब तक कोई गारंटी नहीं लेता, हम बाहर गाड़ी नहीं लगाएंगे। इस पर डीन ने कहा कि सिक्युरिटी एजेंसी की जिम्मेदारी होगी, लेकिन गाड़ी मुझे गैलरी में नहीं दिखना चाहिए।

रजिस्ट्रेशन एवं दवा वितरण विंडो पर फोकसः

अधीक्षक डॉ. मिश्रा ने सेन्ट्रल विंडो पर तैनात गार्ड से जब बढ़ाई गई विंडो की जानकारी मांगी तो वह बता नहीं सका। अधीक्षक ने कहा- जब तुम्हें ही नहीं पता तो मरीजों को क्या बताओगे। पहले खुद जाकर देखो और मरीजों की मदद करो। इसी प्रकार दवा वितरण की 7 विंडो शुरू की गई, लेकिन 5 ही चालू मिली। डीन ने निर्देश दिए मुझे सभी विंडो से दवा वितरण होती मिलना चाहिए।

एप्रिन, नेम प्लेट नहीं तो तुम में और मरीज में क्या अंतरः

निरीक्षण के दौरान डीन एवं अधीक्षक को डॉ. अंकुर अग्रवाल, डॉ. प्रियंका शर्मा बिना एप्रिन के मिले। डीन ने फटकार लगाते हुए कहा कि जब नेम प्लेट और एप्रिन ही नहीं तो कैसे पता चलेगा कि डॉक्टर और मरीज कौन है। इससे विवाद की स्थिति निर्मित होती है। अधीक्षक ने कहा, सभी डॉक्टर हिन्दी में नेम प्लेट लगाएं, जिससे मरीज पढ़ सकें।

नीडिल डिस्ट्रॉय नहीं कर सकीः

एचआईवी रोगियों के लिए बने कमरों में पहुंचे तो यहां एनजीओ के पदाधिकारी बैठे दिखे। जब उनसे परमिशन मांगी तो वह दिखा नहीं सके। इस पर डीन ने कहा कि पहले परमिशन दिखाओ, इसके बाद ही यहां बैठ सकते हो। साथ ही एप्रिन जरूर पहनकर बैठें। नीडिल डिस्ट्रॉय कक्ष में नर्स नीडिल डिस्ट्रॉय नहीं कर सकी, साथ ही किस बाल्टी में कौन सा कचरा डालना है, ये भी नहीं बता सकी। इस पर डीन ने कहा- पहले नियम पढ़ो फिर कचरा फेंकना।

दौड़ते-भागते पहुंचे डॉक्टरः

निरीक्षण के दौरान डीन को जब अस्थिरोग विभाग के दो कक्ष खाली मिले तो वह नाराज हो गए। बाद में पता चला कि डॉक्टरों का ड्यूटी डे नहीं है। इसी प्रकार डॉ. रजनी श्रीवास्तव गायब थीं, जब फोन लगाया तो वह दौड़ती-भागती पहुंची। पता चला राउंड पर थीं। एनएसथिसिया में डॉ. आशीष माथुर अनुपस्थित थे, हालांकि डीन के आने की सूचना मिली तो वह भी थोड़ी देर बाद पहुंच गए। सीटी स्केन में एक लैब टेक्नीशियन नदारद था।

हाई डिपेन्डेंसी यूनिटः

मेडिसिन आईसीयू में हाई डिपेन्डेंसी यूनिट बनाने का निर्णय लिया गया है। ये आईसीयू एवं वार्ड के बीच में बनेगा। जिसमें कम गंभीर रोगियों को रखा जाएगा। इस संबंध में मेडिसिन विभाग के एचओडी से भी चर्चा की गई है। वहीं आईसीयू में शू कवर सिस्टम लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे लोग जूतों के ऊपर कवर पहनकर अंदर जाएंगे और इंफेक्शन भी नहीं फैलेगा।