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ग्वालियर। नईदुनिया प्रतिनिधि

तिघरा से जलालपुर तक 20.5 किलोमीटर लंबी दूरी तक पानी की तीसरी लाइन डालने का कार्य काफी धीमी रफ्तार से चल रहा है। फरवरी से अब तक नौ माह में केवल 4 किलोमीटर लाइन ही बिछाई जा सकी है जबकि टेंडर शर्तों के तहत 8 किमी तक लाइन बिछना थी। फर्म की ढीलपोल और नगर निगम प्रशासन की शह का खामियाजा शहर की जनता को भुगतना पड़ सकता है। क्योंकि यह कार्य अगले साल सितंबर तक पूरा करना है। आज के हालात देखकर दो साल में ही काम पूरा होता नजर नहीं आ रहा। ऐसा होने पर डीडी नगर, मुरार, शताब्दीपुरम सहित आसपास के अन्य क्षेत्रों को तिघरा का पानी नहीं मिल सकेगा। गर्मियों में पेयजल संकट बरकरार रहेगा।

नहर खुदाई पर रोक लगते ही बिगड़ा खेल

तीसरी लाइन बिछाने के कार्य का भूमिपूजन 19 फरवरी को महापौर विवेक शेजवलकर ने किया था। फर्म ने पानी की लाइन स्टेट के समय बनी नहर में ही डालना शुरू किया था। नहर को नष्ट करने का तालपुरा सहित आसपास के गांवों के लोगों ने विरोध किया था। मामला जल संसाधन विभाग के आला अफसरों तक पहुंचा था। आखिर निगम को नहर में लाइन डालने पर पाबंदी लगा दी गई। इससे खेल बिगड़ गया। इसी के बाद काम सुस्त हो गया।

यह है प्रोजेक्ट

-तिघरा से तलवार वाले हनुमान मंदिर जलालपुर तक 20.5 किमी लंबी 42 करोड़ 50 लाख लागत की इस लाइन का काम कांक्रीट उद्योग झांसी को दिया है।

-इस लाइन में 5 फीट 3 इंच गेज के पाइप डाले जाएंगे। एक पाइप का वजन 9 टन है। यह पाइप यही फर्म बनाती है। इतनी मोटी यह पहली लाइन है।

-तलवार वाले हनुमान मंदिर के पास 165 एमएलडी क्षमता का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाया जा रहा है। नई लाइन के जरिए तिघरा से इस प्लांट तक कच्चा पानी लाकर फिल्टर किया जाएगा। फिल्टर पानी उपनगर ग्वालियर, डीडी नगर, शताब्दीपुरम, मुरार क्षेत्रों को सप्लाई किया जाएगा।

-इस लाइन के डलते ही पूरा शहर तिघरा के पानी के लिए कवर हो जाएगा। निगम अधिकारियों का कहना है कि ऐसा होने पर टैंकरों से सप्लाई की जरूरत नहीं होगी और नलकूप की भी जरूरत नहीं पड़ेगी।

-सबसे पहले तिघरा से मोतीझील तक लाइन डाली गई थी। मोतीझील पर वाटर ट्रीटमेंट से पानी फिल्टर कर शहर में सप्लाई किया जाता है।

-दूसरी लाइन तिघरा से सीधे ग्वालियर दक्षिण विधानसभा के क्षेत्रों में लाई गई है। इसके लिए तिघरा बांध के पास ही वाटर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया गया है।

इनका कहना है

तिघरा से पानी की तीसरी लाइन अब तक 8 किमी डलना थी जिसमें से 4.25 किमी ही डल सकी है। काम की सुस्त रफ्तार के लिए फर्म पर पेनल्टी लगा रहे हैं।

आरएन करैया, कार्यपालन यंत्री, पीएचई ननि