विनय वर्मा, बैतूल नईदुनिया। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के गृहनगर से सटे बैतूल संसदीय क्षेत्र में जैसे-जैसे गर्मी अपना असर दिखा रही है वैसे-वैसे चुनावी पारा भी बढ़ रहा है। मतदाताओं के दरवाजे पर नेताओं की जहां दस्तक शुरू हो गई है वहीं उन्हें मनाने और अपने पक्ष में करने के लिए हरसंभव जतन भी राजनीतिक दलों द्वारा किए जाने लगे हैं। इन सबके बीच बैतूल संसदीय क्षेत्र के ग्रामीण क्षेत्रों का मतदाता वोट मांगने पहुंच रहे प्रत्याशी और नेताओं से बुनियादी सुविधाओं को लेकर तीखे सवाल पूछ रहा है। बैतूल जिले के दो सैकड़ा गांवों में पानी की किल्लत चरम पर पहुंच रही है और 300 से अधिक गांवों में वैकल्पिक साधनों से अभी पेयजल मुहैया हो पा रहा है। चुनाव प्रचार जैसे-जैसे जोर पकड़ेगा वैसे-वैसे पेयजल का संकट गांवों को अपनी जद में लेने लगेगा और चुनाव में वोट मांगने पहुंचने वालों से जनता केवल पानी पर ही सवाल पूछने लगेगी।

इतने वर्षों में तो नहीं बन पाई सड़क : आमला विधानसभा क्षेत्र के गांवों में बीते दिनों भाजपा प्रत्याशी जनसंपर्क करने के लिए पहुंचे तो उन्हें तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। ससाबड़, अंधारिया समेत अन्य गांवों में ग्रामीणों ने पहुंच मार्ग की बदहाली से लेकर गांव के भीतर की सड़कों और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी उजागर कर दी। ग्रामीणों का सवाल था कि पिछले कई वर्षों से जनता को न तो पीने का पानी मिल पा रहा है और न ही बारिश के दिनों में कच्ची सड़कों के दलदल से मुक्ति ही मिल पाई है।

स्थानीय मुद्दों को छोड़ योजनाएं गिना रहे प्रत्याशी

बैतूल संसदीय क्षेत्र में मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही है। दोनों दलों के प्रत्याशियों द्वारा जनसंपर्क शुरू कर दिया गया है। जनता के बीच पहुंचकर दोनों ही दलों के प्रत्याशी स्थानीय मुद्दों को छू भी नहीं रहे हैं बल्कि केंद्र और प्रदेश की सरकार की उपलब्धियां गिना रहे हैं या फिर उनकी खामियां गिनाई जा रही हैं। संसदीय क्षेत्र में रोजगार के साधनों की कमी, सिंचाई के संसाधनों का अभाव और गांवों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने के लिए कोई बात नहीं कर रहा है। कांग्रेस के प्रत्याशी रामू टेकाम ने हरदा, हरसूद क्षेत्र से अपने जनसंपर्क की शुरुआत की है जबकि भाजपा प्रत्याशी दुर्गादास उइके ने आमला विधानसभा क्षेत्र से जनता के बीच पहुंचने का सिलसिला प्रारंभ किया है।

दो साल से हल नहीं हुई समस्या

भैंसदेही विधानसभा क्षेत्र के ग्राम काबरामाल में हर साल गर्मी के मौसम में पानी की किल्लत का स्थायी निदान करने ग्रामीण दो साल से हर दरवाजे पर दस्तक दे चुके हैं लेकिन अब तक न तो जनप्रतिनिधियों ने कोई सुध ली है और न ही प्रशासन की नींद ही खुल पाई। आलम यह है कि गांव में निवास करने वाली 700 से अधिक की आबादी गांव के बाहर स्थित एक कुएं के गंदे पानी से ही अपनी प्यास बुझा रही है। ग्रामीणों ने तय कर लिया है कि अब उनके गांव में जो भी वोट मांगने आएगा उसे वही पानी पिलाएंगे जो वे पी रहे हैं। इसके बाद ही उन्हें सहयोग देने या न देने का निर्णय लिया जाएगा। ग्राम काबरामाल के प्रकाश पवार का कहना है कि आज तक न तो सांसद इस गांव में आईं और न ही विधायक ही पहुंच पाए।

नाकामी से उठ रहे विरोध के स्वर

बैतूल संसदीय क्षेत्र में सुविधाओं को तरसते ग्रामीणों ने अब सांसद और विधायक द्वारा उपेक्षा किए जाने के कारण चुनाव में मतदान न करने का मन बनाया है। ग्राम काबरामाल, चोहटा-पोपटी, खैरा, पालंगा समेत अन्य गांवों के लोग सड़क और पानी की समस्या के चलते चुनाव का बहिष्कार करने की रणनीति बना रहे हैं।

जिले में अल्पवर्षा के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की समस्या सामने आ रही है। हम पूरी तरह से प्रयास कर रहे हैं कि ग्रामीणों को शुद्ध पानी मुहैया कराया जाए। ग्रामीणों को मतदान के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। -तरुण पिथोड़े, कलेक्टर, बैतूल