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बैतूल। बच्चों को निरोगी रखने के लिए गोवर्धन पर लिटाते हुए परिजन।

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बैतूल। टिकारी में गोवर्धन बनाकर पूजा-अर्चना करते हुए श्रद्धालु।

बैतूल। नवदुनिया प्रतिनिधि

गुरुवार को जिले भर में श्रद्धाभाव से गोवर्धन पूजा और अन्नाकूट उत्सव मनाया गया। जगह-जगह गाय के गोबर से गोवर्धन बनाकर पूजा की गई। जिला मुख्यालय पर टिकारी और सदर क्षेत्र में बच्चों के निरोगी होने की कामना करते हुए उन्हें गोवर्धन में लिटाया गया। इसके साथ ही मंदिरों में अन्नाकूट उत्सव मनाया गया। इसमें भगवान को 56 पकवानों का भोग लगाया गया।

महापर्व दीपावली के अगले दिन गुरुवार को गोवर्धन पूजा की गई। गाय के गोबर से घर-घर में गोवर्धन पर्वत बनाए गए और पूजा-अर्चना की गई। ग्रामीण क्षेत्र में दीपावली की तरह उतने ही श्रद्धाभाव से गोवर्धन पूजा भी की गई। ग्रामीण क्षेत्र में गाय भी खिलाई गई। गाय खिलाने का यह खेल देखने के लिए शहरी क्षेत्र से भी बड़ी संख्या में लोग गांव पहुंचे। शहर के टिकारी क्षेत्र में गौली मोहल्ला स्थित ग्वालटोली और सदर स्थित तलैया मोहल्ला में गोवर्धन पूजा का विशेष आयोजन यादव समाज ने किया। यहां गोवर्धन बनाकर पूजा-अर्चना की गई और उसके बाद छोटे-छोटे बच्चों को गोवर्धन की गोद में लिटा दिया गया। परम्पराओं से अनजान कई बच्चे रोते रहे और परिजन उन्हें गोबर में लथपथ होते देख खुश होते रहे। मान्यता है कि गोवर्धन में लिटाने से बच्चों को कोई बीमारी नहीं होती और वे स्वस्थ रहते हैं। यादव समाज के शहर से बाहर रह रहे सदस्य भी गोवर्धन में अपने बच्चे को लिटाने के लिए दूर-दूर से इस मौके पर पहुंचते हैं।

यह है इस पर्व की मान्यता

यादव समाज के सदस्य राजेश यादव बताते हैं कि भगवान कृष्ण ने ग्रामीणों को इंद्र के प्रकोप से बचाने के लिए अपनी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया था। उसी समय से यह उत्सव मनाया जाता है। गाय के गोबर से गोवर्धन की आकृति बनाकर उसकी पूजा-अर्चना की जाती है और इसमें बच्चों को लिटाया जाता है। मान्यता है और हमारा आजमाया हुआ भी है कि इससे बच्चे निरोगी रहते हैं।

अन्नाकूट पर मंदिरों में हुए भंडारे

गोवर्धन पूजन के साथ ही गुरुवार को मंदिरों में अन्नाकूट पूजन भी किया गया। इस अवसर पर भगवान को नए अनाज से बने 56 पकवानों का भोग लगाया गया। परम्परा के अनुसार सभी पकवान इस साल उपजे अनाज के ही बनाए गए। शहर के कोठीबाजार स्थित कृष्ण मंदिर और गंज स्थित बीजासनी मंदिर में अन्नाकूट का पर्व मनाया गया। यहां विशेष पूजन के बाद भंडारे का आयोजन किया गया। पूजन और भंडारे में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। जिला मुख्यालय और जिले के अन्य मंदिरों में भी अन्नाकूट पूजन के आयोजन किए गए। श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर यह कामना की किउनके अन्ना के भंडार सदा भरे रहे।