तमिलनाडू में 7 मजदूरों को अब भी मुक्त होने का इंतजार

- आधा दर्जन मजदूरों को संयुक्त प्रयासों से कराया जा चुका मुक्त

बैतूल। नवदुनिया प्रतिनिधि

तमिलनाडू में जिले के आदिवासी ग्रामों के मजदूरों को बंधक बनाकर काम लेने की शिकायत पर संयुक्त प्रयासों से 6 मजदूरों की तो वापसी हो गई है पर अभी भी 7 मजदूर एक बोरवेल कंपनी में बंधक है। प्रशासन द्वारा उनको भी रेस्क्यू कर मुक्त कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। कलेक्टर तरुण पिथोड़े, एसपी कार्तिकेयन के., श्रम पदाधिकारी धम्मदीप भगत एवं देवास के एनजीओ जनसाहस के साझा प्रयासों से 6 मजदूरों को मुक्त कराकर बैतूल वापस लाया गया है।

तमिलनाडू के इरोडी और ठेनी जिले में बोरवेल संचालकों द्वारा 7-7 मजदूरों को बंधक बनाने की शिकायत मिलने के बाद तमिलनाडू के इरोडी एवं ठेनी जिले के कलेक्टरों को मजदूरों को आजाद कराने रेस्क्यू में सहयोग के लिए कलेक्टर श्री पिथोड़े ने पत्र लिखा था। इसके अलावा श्रम पदाधिकारी ध?मदीप भगत को रेस्क्यू कर बंधक बनाए मजदूरों को वापस लाने के निर्देश दिए गए थे। श्रम पदाधिकारी श्री भगत ने एसपी कार्तिकेयन के. की मदद से पुलिस एवं एनजीओ के साथ मिलकर तमिलनाडू के दोनों जिलों के प्रशासन की मदद ली। जनसाहस एनजीओ के प्रतिनिधि से मिली जानकारी के अनुसार ठेनी जिले में अमन बोरवेल मशीन के संचालक द्वारा बंधक बनाकर दिन-रात बिना मजदूरी दिए काम करवाया जा रहा था। मजदूर मुकेश, दिनेश, रामविलास, रोशन, सूरज, मनोहरी ने बताया कि मशीन संचालक ने उन्हें प्रतिमाह 9 हजार रुपए मजदूरी सहित खाने-पीने, रहने की व्यवस्था देने का कहकर तमिलनाडू के ठेनी जिले में मजदूरी के लिए ले गया था। मशीन संचालक द्वारा बिना मजदूरी का भुगतान दिए 15 से 18 घंटे तक बोरवेल का काम करवाया गया। सूचना पर तमिलनाडु पुलिस ने अमन बोरवेल मशीन के मालिक के खिलाफ बीएल एक्ट 1976 के तहत कार्रवाई कर मजदूरों को मुक्त कराया व मुक्ति प्रमाण पत्र दिया। इन मजदूरों को तमिलनाडु पुलिस के अधिकारियों ने बैतूल पुलिस को सौंपा। वर्तमान में इरोडी जिले में भी एक अन्य बोरवेल संचालक द्वारा 7 मजदूरों से बंधक बनाकर काम लिया जा रहा है। बैतूल का संयुक्त दल इन मजदूरों को भी मुक्त कराने लगातार प्रयास कर रहा है।