भिंड। वर्ष 1989 से भाजपा की गढ़ भिंड-दतिया लोकसभा सीट पर दावेदार सामने आ रहे हैं। वर्तमान में भाजपा के डॉ. भागीरथ प्रसाद सांसद हैं। डॉ. प्रसाद जिले के पहले आईएएस हैं। प्रमुख सचिव गृह के पद पर सेवाएं दे चुके हैं। सांसद प्रसाद को लोकसभा चुनाव में टक्कर देने दतिया मेडिकल कॉलेज में मेडिसिन की विभागाध्यक्ष डॉ. सीमा महंत कांग्रेस से दावेदारी कर रही हैं। डॉ. सीमा दतिया की रहने वाली हैं। उनके दादा हरनारायण पटेल नगरपालिका अध्यक्ष रहे हैं। चचिया ससुर चरणदास महंत वर्तमान में छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष हैं। लोकसभा चुनाव में भाजपा ने डॉ. प्रसाद को दोबारा प्रत्याशी बनाया और कांग्रेस ने डॉ. महंत को मौका दिया तो पहला मौका होगा जब दोनों दलों से हाई क्वालीफाई प्रत्याशी मैदान में होंगे।

लोकसभा के लिए 4 चैलेंज बनाए

सर्किट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस से टिकट की दावेदारी कर रही डॉ. सीमा महंत ने कहा वे रायपुर, रीवा, ग्वालियर और भोपाल में सेवाएं दे चुकी हैं। जिले के लिए काम करना चाहती थी तो दतिया मेडिकल कॉलेज में पिछले 1 साल से मेडिसिन की विभागाध्यक्ष बतौर काम कर रही हैं। डॉ महंत का कहना है चिकित्सा क्षेत्र में वे एक सीमित क्षेत्र में काम कर सकती हैं, लेकिन राजनीति से जुड़कर व्यापक क्षेत्र में काम कर भिंड-दतिया जिले के लोगों की सेवा करना चाहती हैं।

डॉ. महंत ने कहा कि उन्हें मौका मिला तो 4 चैलेंज पर काम प्राथमिकता में रहेगा। पहला प्राइमरी एजूकेशन सिस्टम को सुधार कर इस लेवल पर पहुंचाना कि जिले के बच्चे बाहर के बच्चों से कॉम्प्टीशन कर सकें। दूसरा स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाकर दरवाजे-दरवाजे पर चिकित्सा सुविधा मुहैया कराना। तीसरा शिक्षा, स्वास्थ्य, नौकरी में महिलाओं को सशक्त बनाना और चौथा जिले के युवाओं के लिए रोजगार के साधन मुहैया कराना होगा।

भाजपा-कांग्रेस में यह दावेदार सामने

लोकसभा चुनाव में भाजपा से सांसद डॉ. भागीरथ प्रसाद के अलावा पूर्व सांसद और मुरैना महापौर अशोक अर्गल, पूर्व मंत्री लाल सिंह आर्य, पूर्व विधायक ओमप्रकाश खटीक पूर्व विधायक, संध्या राय, घनश्याम पिरौनिया, सुनील वाल्मीकि, शंभुदयाल शाक्य के नाम टिकट के दावेदारों के तौर पर सामने आ रहे हैं। कांग्रेस में डॉ. सीमा महंत के अलावा पूर्व मंत्री महेंद्र बौद्व, जिला पंचायत अध्यक्ष रामनारायण हिंडौलिया, इंजीनियर सुनील शेजवार, पूर्व विधायक कमलापत आर्य, पूर्व नपाध्यक्ष शांतिस्वरूप शाक्य, केशव देसाई टिकट के दावेदारों में हैं।

लोकसभा में सिर्फ 3 बार जीती कांग्रेस

भिंड सीट शुरुआत से ही भाजपा का गढ़ रही है। यहां कांग्रेस पहली बार 1962 में जीती। तब सूरज प्रसाद सांसद बने। 1967 में चुनाव हुए तो यह सीट जनसंघ के पास चली गई। वायएस कुशवाह सांसद बने। 1971 में जनसंघ से राजमाता विजयाराजे सिंधिया सांसद रही। 1977 में बीएलडी से रघुवीर सिंह सांसद बने। 1980 में यह सीट फिर से कांग्रेस के पास आई। कालीचरण शर्मा सांसद बने। 1984 में कांग्रेस से कृष्णा सिंह सांसद हुईं। 1989 से अब तक लगातार यह सीट भाजपा के पास है। 1989 में भाजपा के नरसिंहराव दीक्षित सांसद बने। 1991 में भाजपा से योगानंद सरस्वती सांसद रहे। 1996 से 2004 तक लगातार चार बार भाजपा से डॉ. रामलखन सिंह सांसद रहे। इसके बाद सीट आरिक्षत हुई तो यहां भाजपा से अशोक अर्गल सांसद रहे और 2014 के चुनाव में भाजपा से डॉ. भागीरथ प्रसाद सांसद हैं।