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    फसलें बर्बाद कर रहीं नीलगाय व आवारा मवेशी

    Published: Fri, 08 Dec 2017 03:24 PM (IST) | Updated: Fri, 08 Dec 2017 03:24 PM (IST)
    By: Editorial Team

    भिंड। नईदुनिया प्रतिनिधि

    रबी फसल की नीलगाय से सुरक्षा करना किसानों के लिए चुनौती बन गई है। रात में नीलगाय के झुंड खेतों में दौड़ कर फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। इससे बचाव के लिए किसानों को खेतों में रात बीताकर फसल की रखवाली करना पड़ रही है।

    जिले की 35 पंचायतों के 65 गांवों में नीलगाय किसानों के लिए परेशानी बन गई है। खेतों में सरसों, गेहूं, चना, अरहर सहित अन्य फेसल लगी हुई है। सरसों और धनिया की फसल में फूल आने लगे हैं। इनकी महक से नीलगाय खेतों में आने लगी है। इनके साथ जंगली सुअर भी नुकसान कर रहे है। मानगढ़ निवासी प्रभुलाल, भीम सिंह ने बताया फसल बचाने के लिए खेतों की तार फेंसिंग, साड़ी रोल एवं साउंड सिस्टम के जतन कर रहे है। खेतों के बीच पुतले खड़े कर व झोपड़ी बनाकर वहीं पर रात गुजार रहे हैं। भिंड, रौन, ऊमरी, लहार विकासखंड में नीलगाय

    की संख्या बढ़ती जा रही है। रौन के मानगढ़, निवसाई, भीमनगर, इंदुर्खी, मढ़ैयन, रेंवजा, महायर, मुसावली, बहादुर, ऊमरी के कनावर, अकोड़ा, नयागांव, टेंहनगुर, बिलाव, ढोंचरा, श्यामपुरा, खैरा सहित अन्य क्षेत्रों में किसान फसलों की सुरक्षा में जुटे हुए है। वन विभाग का नीलगाय पकड़ने के लिए बोमा प्रोजेक्ट कागजों में ही चल रहा है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि शासन से आदेश मिलते ही प्रोजेक्ट लगाकर कार्रवाई की जाएगी

    जिले में 2 हजार से अधिक नीलगाय :

    वन विभाग रिकॉर्ड के अनुसार जिले में करीब 2 हजार नीलगाय हैं। जबकि हकीकत में यह आंकड़ा अनगिनत है। इस समस्या पर जनप्रतिनिधि भी ध्या न नहीं दे रहे है। अफसर नियमों में उलझे हुए है। किसानों ने कई बार अफसरों को ज्ञापन दिए। जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया लेकिन अब तक समाधान नहीं हुआ। ऊमरी के किसान नेता वीरेन्द्र सिंह यादव पुनू ने बताया कि नीलगाय सहित अन्य आवारा जानवारों को पकड़ने के लिए कई बार अधिकारियों को ज्ञापन दे चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। नयागांव के किसान शिवसिंह, महेश सिंह ने बताया कि अब तो नीलगाय किसान से डरती भी नहीं है। एक-दो लोगों सामने आ जाए तो नील गाय उसका सामना करने लगती हैं।

    नीलगाय से फसल बचाने के लिए यह करें :

    - तारफेंसिंग : खेतों के चारों और मोटी जाली वाली तारफेंसिंग कर फसल की सुरक्षा की जा सकती है।

    - दवाइयां : नीलगायों के सूंघने की शक्ति अधिक होती है। बाजार में कई रासायनिक दवाइयां उपलब्ध है जो खेत और फसल के आसपास छिड़काव करने से उसकी गंध से नीलगाय खेतों में नहीं आएगी।

    - देशी तरीका : गोबर के पानी के साथ मिश्रण कर फसल के आसपास एक मीटर में चारों तरफ छिड़काव करके फिनाइल या सल्फॉस की गोलियों को कपड़ों में लपेट कर खेत की मेड़ के आसपास रखकर नीलगाय को रोका जा सकता है।

    - पटाखों से : रात में ज्यादा आवाज पटाखे फोड़कर उन्हें भगाया जा सकता है।

    - इलेक्ट्रॉनिक उपकरण : खेत में बल्ब, चमकदार लाइट सीरिज बंद चालू होने वाले, छोटे बल्ब लगाने के साथ 5 मिनट के अंतराल में अलार्म बजाने वाला सर्किट लगा कर नीलगाय को खेतों में

    आने से रोका जा सकता है।

    वर्जन :

    ऊमरी सहित आसपास के क्षेत्र में नीलगाय व अवारा जानवर खेत में खड़ी फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। आवारा जानवरों को पकड़ने के लिए हम अधिकारियों को ज्ञापन दे चुके हैं। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई है।

    वीरेन्द्र सिंह यादव, किसान नेता ऊमरी

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