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    प्राथमिक स्कूल का भवन हुआ जर्जर, कैसे पढ़ेंगे छात्र

    Published: Fri, 08 Dec 2017 04:03 PM (IST) | Updated: Fri, 08 Dec 2017 04:03 PM (IST)
    By: Editorial Team

    रावतपुरा-गोरमी। नईदुनिया न्यूज

    रावतपुरा कला गांव के सरकारी प्राथमिक स्कूल भवन की हालत पूरी तरह से जर्जर है। एक कमरे के इस भवन में छत से कभी प्लास्टर गिरता है तो कभी दीवारें चटक जाती हैं। शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन ने भी भवन के जीर्णोद्घार व मरम्मत को लेकर कोई पहल नहीं की है। गांव के नौनिहालों को क्षतिग्रस्त कक्षों में बैठकर शिक्षा प्राप्त करनी पड़ रही है। ऐसे में शिक्षकों के साथ छात्रों में हर पल दहशत का माहौल व्याप्त रहता है।

    हो सकता है बड़ा हादसा

    रावतपुरा कला गांव में बना सरकारी प्राथमिक स्कूल का भवन जीर्ण शीर्ण अवस्था में होने के कारण कभी भी बड़ा हादसा होने की संभावना बनी हुई है। स्कूल के कई कक्षों की क्षत से प्लास्टर उखड़ गया है और छत में लगी ईंटें गिरने लगी हैं। फिर भी जगह के अभाव में छात्रों को इसी छत के नीचे दहशत में शिक्षा गृहण करने के लिए बिठाया जा रहा है। अगर कोई अनहोनी होती है तो यह प्रशासन की सबसे बड़ी चूक होगी। क्योंकि स्कूल के हेडमास्टर ने प्रशासन को मेंटेनेंस के लिए बार-बार चेताया है। लेकिन मरम्मत को लेकर ध्यान नहीं दिया गया है।

    8 साल से अधूरा निर्माण

    वर्तमान में संचालित भवन में एक कक्ष के साथ सायबान भी बना हुआ है। स्कूल में करीब 50 छात्रों की संख्या है। जिन्हें शिक्षा प्रदान करने के लिए चार शिक्षक पदस्थ हैं। भवन 8 साल पहले ही जर्जर हो चुका था। तब शिक्षकों की मांग पर पंचायत की तरफ से तत्कालीन सरपंच द्वारा पुराने भवन के पास स्कूल की नई बिल्डिंग का निर्माण कराया गया था। मगर भवन का निर्माण पूरा होने से पहले ही बीच में लटका दिया गया। जिसके बाद आज तक नए भवन का निर्माण अधूरा पड़ा है। जिसकी जिम्मेदारी लेने के लिए कोई भी प्रशासनिक अधिकारी तैयार नहीं है।

    सिंचाई विभाग का रेस्ट हाउस जर्जर

    गोरमी में पोरसा रोड पर वार्ड 4 स्थित सिंचाई विभाग कॉलोनी में 4 कमरे और एक सायबान से बने रेस्ट हाउस देखरेख के अभाव में पूरी तरह से जर्जर हो गया है। रेस्ट हाउस की दवारें और छत से प्लास्टर टपककर गिर रहा है। लेकिन विभागीय अधिकारियों ने अभी तक ध्यान नहीं दिया है। भवन की देखरेख के लिए भी कोई कर्मचारी को जिम्मेदारी नहीं दी गई है। जबकि मेंटेनेंस को लेकर अधिकारियों से बात करते हैं तो वह यह कहकर पलड़ा झाड़ देते हैं कि हमारे पास फंड नहीं है। ऐसे में रेस्ट हाउस पूरी तरह से क्षतिग्रस्त होने की कगार पर पहुंच गया है।

    निजी आवासों पर हो रही बैठकें

    कस्बे में रेस्ट हाउस की अनदेखी होने के कारण निजी आवासों पर बैठकें आयोजित की जाती हैं। इसके साथ ही सरकारी मेहमानों के ठहरने के लिए भवन में किसी प्रकार की सुविधा का ध्यान नहीं रखा गया है। पूर्व में रेस्ट हाउस में तहसील कार्यालय संचालित किया जाता था। लेकिन नए भवन में तहसील शिफ्ट होने के बाद रेस्ट हाउस की तरफ विभागीय अधिकारियों का ध्यान नहीं है। हालत यह है कि भवन की दीवारें और छतें धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होकर ढहने की स्थिति में पहुंच गई हैं। जिससे आसपास के लोगों में दहशत व्याप्त रहती है।

    वर्जनः

    हमारे बच्चे स्कूल में पढ़ते हैं। लेकिन स्कूल में एकमात्र कक्ष पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। जिससे बच्चों को स्कूल पहुंचाने में भय लगता है।

    बबलू झा, स्थानीय निवासी रावतपुरा कला।

    वर्जनः

    सिंचाई विभाग का रेस्ट हाउस देखरेख के अभाव में पूरी तरह से जर्जर हो रहा है। भवन की दीवारें और छतों से प्लास्टर टपकने लगा है।

    कृष्ण प्रसाद कटारे, स्थानीय निवासी वार्ड 3 गोरमी

    वर्जनः

    विभाग के पास फंड की कमी है। जिसके कारण रेस्ट हाउस का मेंटेनेंस व देखरेख का कार्य संपादित नहीं हो पा रहा है। हम वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा कर भवन की मरम्मत का प्रयास करेंगे।

    महेन्द्र सिंह, एसडीओ सिंचाई विभाग गोरमी।

    वर्जनः

    स्कूल के लिए अतिरिक्त कक्ष का निर्माण तत्कालीन सरपंच द्वारा अधूरा छोड़ने पर राशि की वसूली की जा रही है। हम जांच कराकर भवन का मेंटेनेंस कराएंगे।

    संजीव कुमार शर्मा, डीपीसी भिंड

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