भिंड। नईदुनिया प्रतिनिधि

यज्ञ के माध्यम हम वेद मंत्रों के साथ सगुंधित खाद्य सामग्री से होम करते हैं। अग्नि एवं वायु के माध्यम से हमारा परिवेश शुद्ध होता है। सभी प्राणियों को आरोग्य वर्धक स्वांस लेने के लिए विशुद्ध वायु मिलती है। यह स्वास्थ्य के लिए हितकारी साबित होती है। यज्ञ से सीधे तौर पर स्वास्थ्य लाभ होता है तथा मंत्रों की गूंज से हमारा अंतःकरण शुद्ध होता है। इसलिए हर व्यक्ति को यज्ञ अनुष्ठान करना चाहिए। उक्त उद्गार शहर के पुराना सराफा गायत्री नगर स्थित गायत्री शक्तिपीठ तीर्थ पर नवग्रह महायज्ञ की मंगल कलश यात्रा के अवसर पर व्यवस्थापक डॉ. सतीश चंद्र शुक्ला ने व्यक्त किए। इससे अकेले मानव की ही नहीं पशु-पक्षियों और वनस्पतियों की रक्षा होती है। मनुष्य का अंतःकरण यज्ञ से शुद्ध होता है, जिससे देवों का आशीर्वाद और अनुदार

मिलता है। हमारी यज्ञ प्रधान संस्कृति में गर्भस्थ शिशु के लिए पुंसवन संस्कार का प्रावधान है। इस प्रकार से जन्म के पहले से जीवनोपरांत तक संस्कारों का विधान है। यज्ञ को दुःख और पाप नाशक भी कहा गया है। यज्ञीय प्रभाव से जीवन का प्रत्येक क्षण स्वर्गीय से भर जाता है।