भोपाल। आखिरकार निगम प्रशासन ने शहर में मनोरंजन कर लागू करने का आदेश जारी कर दिया। यह कर 9 जुलाई 2018 से वसूला जाएगा। राज्य सरकार ने 20 प्रतिशत कर वसूली का प्रावधान किया था, लेकिन निगम 5 से 15 फीसदी तक के स्लैब के हिसाब से कर वसूलेगा।

सिनेमा के टिकट पर 5 से 15 प्रतिशत का स्लैब तय किया गया है। सबसे अधिक 200 रुपए से ज्यादा के टिकट पर 15 प्रतिशत मनोरंजन कर और 28 प्रतिशत जीएसटी चुकाना होगा। यानी कुल 286 रुपए चुकाने होंगे। जबकि मुफ्त में यदि कहीं मनोरंजन हो रहा है तो वह टैक्स के दायरे से बाहर रखा गया है। इससे इंटरनेट व मोबाइल कंपनियों के मुफ्त वाले ऑफर टैक्स से बाहर हो गए हैं। हालांकि अमेजन प्राइम वीडियो, नेटफ्लिक्स जैसी कंपनियों के ऑनलाइन पेड वीडियो पर 15 प्रतिशत का टैक्स लगेगा। निगम के साथ दिक्कत यह भी है कि इंटरनेट को दूरसंचार सेवा के तहत जीएसटी में लिया गया है लेकिन इंटरनेट का हर कंटेट मनोरंजन नहीं होता है। ऐसे में इंटरनेट पर यह बहुत मुश्किल है कि किससे टैक्स लिया जाए।

बता दें कि निगम परिषद में मनोरंजन कर का संकल्प गत 2 अगस्त को पारित किया गया था। इसके बाद यूएडीडी ने सभी निकायों को 31 अगस्त तक हर हाल में इसे लागू करने की मोहलत दी गई थी, लेकिन आदेश जारी होने में समय लग गया।

यह मनोरंजन कर की दरें

मनोरंजन का प्रकार - दरें

सिनेमा टिकट - 99 रुपए तक 5 प्रतिशत

सिनेमा टिकट - 199 रुपए तक 10 प्रतिशत

सिनेमा टिकट - 200 से ज्यादा पर 15 प्रतिशत

होटल व रेस्टोरेंट में डांस, प्रदर्शन आदि पर - कुल आय का 10 प्रतिशत

सर्कस, ड्रामा आदि - कुल आय का 10 प्रतिशत

खेल (क्रिकेट, हॉकी व अन्य) जिसमें टिकट लिया जाता है - कुल आय का 5 प्रतिशत

डिस्को पब, क्लब्स, पूल, गेम जोन आदि - वार्षिक टर्नओवर का 15 प्रतिशत

डीटीएच, टेलीकॉम व अन्य तकनीकी साधनों से मनोरंजन - टर्नओवर पर 15 प्रतिशत

विज्ञापन से कमाई पर यू ट्यूब, फेसबुक टैक्स फ्री

यूट्यूब, फेसबुक सहित अन्य कंपनियां उपभोक्ता के बजाए विज्ञापन से कमाई करती हैं। लेकिन, इनसे टैक्स नहीं लिया जाएगा। निगम का तर्क है कि जिन कंपनियों का टर्नओवर नहीं है और वे उपभोक्ता से कोई शुल्क नहीं ले रही है तो वे टैक्स के दायरे से बाहर हैं।

मोबाइल ऑपरेटरों से कहा खुद ही असेसमेंट करें

मोबाइल ऑपरेटरों को खुद ही असेसमेंट कर टैक्स भरने के लिए कहा गया है। हालांकि कंपनियों को भी अपने सॉफ्टवेयर व रजिस्ट्रेशन आदि अपडेट करने होंगे। ऐसे में फिलहाल एकदम से वसूली संभव नहीं।

सौंपी जिम्मेदारी

निगम के आदेश के मुताबिक निगम सीमा में मनोरंजन से जुड़ी कंपनियों को रजिस्ट्रेशन कराना होगा। वार्ड प्रभारी व जोनल अधिकारियों को इसका जिम्मा सौंपा गया है।