भोपाल। बिजली संकट को लेकर भाजपा के हमलों के बाद अब प्रदेश कांग्रेस कमेटी भी प्रदेश सरकार के बचाव में आ गई है। पीसीसी के मीडिया विभाग ने दावा किया कि प्रदेश में शिवराज सरकार के मुकाबले 48 फीसदी ज्यादा बिजली दी जा रही है। वहीं, कटौती का अंदाज इससे लगाया जा सकता है कि शून्य ट्रिपिंग वाले 11 केवीए (किलोवॉट एम्पीयर) के फीडर शिवराज सरकार में 10 जून 2018 को जहां 141 थे, वहीं कमलनाथ सरकार में इसी तारीख को ऐसे फीडर 208 हैं।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया विभाग की अध्यक्ष शोभा ओझा, उपाध्यक्ष अभय दुबे और पीसीसी अध्यक्ष के मीडिया समन्वयक नरेंद्र सलूजा ने बुधवार को पत्रकारवार्ता में यह बात कही। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सत्ता की बत्ती गुल होने से भाजपा बेचैन है।

उन्होंने मुख्यमंत्री कमलनाथ को 'प्रगतिनाथ" की उपाधि देने हुए कहा कि उनके नेतृत्व में प्रदेश आगे बढ़ रहा है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि छह माह में अपराध की दर में भी कमी आई है। खासकर महिला अपराध कम हुए हैं। उन्होंने भाजपा पर जनता को गुमराह करने के लिए भ्रामक प्रचार करने के आरोप लगाए। इसमें भाजपा में नंबर वन नेता की दौड़ बताया।

2018 से 2019 में डेढ़ गुना मांग बढ़ी

उन्होंने बिजली कंपनियों के आंकड़ों के हवाले से बताया कि 10 जून 2018 को जहां बिजली की मांग केवल 1426 लाख यूनिट थी, वहीं कांग्रेस सरकार में यह मांग 10 जून 2019 को 2114 लाख यूनिट तक पहुंच गई है। एक जून से 10 जून 2018 और 2019 की तुलना करते हुए नेताओं ने दावा किया है कि 16 प्रतिशत से लेकर 48 फीसदी तक मांग बिजली की बढ़ी है।

बिजली कटौती के आंकड़ों में कांग्रेस नेताओं ने 11 केवीए फीडर में एक मिनट से कम, पांच से 10 मिनट, 11 से 20 मिनट और 20 मिनट से ज्यादा तथा एक घंटे से ज्यादा की स्थिति का 1 से 10 जून का तुलनात्मक ब्योरा दिया। बताया गया कि 10 जून को 11 केवीए के फीडरों पर शिवराज सरकार में 147 फीडरों पर ट्रिपिंग हुई थी, जबकि इस साल मात्र 80 फीडर ऐसे रहे। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि प्रदेश में 19 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन हो सकता है, जबकि अभी 9445 मेगावाट की मांग की पूर्ति बिजली कंपनियों द्वारा की जा रही है।