भोपाल (ब्यूरो)। प्रदेश में संपत्ति की ऑनलाईन रजिस्ट्री को सुरक्षित बनाने के लिए राज्य सरकार ने ई-रजिस्ट्री में जालसाजी करने वालों को 7 साल की सजा का प्रावधान रखा है। ई-रजिस्ट्री को कानूनी वैधता देने के लिए सरकार मप्र रजिस्ट्रीकरण संशोधन अध्यादेश का प्रस्ताव राज्यपाल रामनरेश यादव को भेजा है।

संशोधित अध्यादेश के प्रस्ताव के अनुसार अब हर कानूनी रजिस्टर्ड दस्तावेज में पंजीयन कराना आवश्यक होगा। उक्त दस्तावेजों का पंजीयन होने के बाद ही कानूनी मान्यता मिल पाएगी। साथ ही हर रजिस्टर्ड दस्तावेज पर फोटो लगाना अनिवार्य होगा। वर्तमान में यह व्यवस्था प्रशासनिक स्तर पर की जा रही थी।

अब इसे भी कानून में शामिल कर लिया गया है। अध्यादेश मंजूर होने के बाद ई-रजिस्ट्री को कानूनी मान्यता मिल जाएगी। नए प्रावधान के अनुसार संपत्ति के खरीददार या बेचने वाले एक से अधिक होने पर इन सभी को हर हाल में 4 माह के अंदर रजिस्ट्री पर हस्ताक्षर करना होंगे।

उक्त अवधि के बाद दस गुना रजिस्ट्रेशन शुल्क वसूला जाएगा। वर्तमान में इसकी कोई समय सीमा न होने के कारण एक से अधिक खरीददार और विक्रेता होने पर विवाद की स्थिति या सबको समय न मिल पाने के कारण रजिस्ट्रार आफिस में सालों तक संपत्ति की रजिस्ट्री अटकी रहती है।