भोपाल। आयकर विभाग के शिकंजे में आए बहुचर्चित आईएएस अधिकारी दंपती अरविंद-टीनू जोशी की एफडी-बॉन्ड का मामला दिल्ली स्थित न्याय निर्णयन प्राधिकरण (एडजुडीकेटिंग अथॉरिटी) को भेजा गया है। जोशी दंपती के नाम पर सवा तीन करोड़ रुपए की एफडी-बॉन्ड मिले थे। आईसीआईसीआई बैंक में इसके लिए अलग-अलग नाम से करीब तीन दर्जन लोगों ने एंट्री कराई थी। आयकर विभाग ने इसे अटैच कर लिया है।

आयकर विभाग की बेनामी प्रॉपर्टी विंग ने मामले में जोशी को नोटिस जारी किया था। उनके अलावा आईसीआईसीआई बैंक की एजेंट सीमा जायसवाल, उसके परिजन, ड्राइवर एवं बैंक के मैनेजर्स को भी नोटिस दिए गए थे। छानबीन के बाद विभाग इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि सवा तीन करोड़ रुपए अवैध रूप से हासिल किए गए।

पूछताछ में जोशी दंपती इसका कोई समाधानकारक जवाब अथवा दस्तावेज-तथ्य आदि नहीं पेश कर पाए। इसके बाद विभाग ने इसे अटैच कर लिया। मामला अब न्याय निर्णयन प्राधिकरण के निर्णयार्थ भेजा गया है।

एफडी के बारे में की पूछताछ

आयकर विभाग ने कुछ दिन पहले बेनामी प्रॉपर्टी अधिनियम के तहत जोशी दंपती को नोटिस जारी कर यह पूछा था कि उन्होंने सवा तीन करोड़ रुपए की एफडी परिवार और रिश्तेदार के नाम पर क्यों कराईं? इस संबंध में आईसीआईसीआई के स्टाफ ने सारा दोष जोशी दंपती और सीमा पर ही मढ़ दिया है।

90 करोड़ की है डिमांड

उल्लेखनीय है कि आयकर विभाग ने फरवरी 2010 में जोशी दंपती के सरकारी आवास सहित उनके परिजनों एवं अन्य लोगों के निवास व कार्यालयों पर छापा मारकर करीब 350 करोड़ रुपए मूल्य की अघोषित संपत्ति का खुलासा किया था। विभाग ने लंबी छानबीन और असेसमेंट के बाद 90 करोड़ रुपए का डिमांड नोटिस जारी किया था। भोपाल, रायसेन, सीहोर एवं दिल्ली में स्थित जोशी दंपती की 27 अचल संपत्तियों को विभाग ने अटैच कर लिया है। हालांकि टैक्स डिमांड के मामले में जोशी ने अपील भी की है।

न्याय निर्णयन प्राधिकरण करता है कुर्की-जब्ती की पुष्टि

कालेधन को नंबर एक में बदलने से रोकने वाले कानून 'प्रीवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट" के तहत न्याय निर्णयन प्राधिकरण को यह अधिकार है कि वह ऐसी संपत्ति जो कि धनशोधन में शामिल है उसे कुर्क अथवा जब्त करने संबंधी कार्रवाई की पुष्टि करता है।