ब्रजेन्द्र वर्मा, भोपाल। शहर के वैशाली नगर तिराहे के पास कुछ महीनों पहले एक व्यक्ति रेन ट्री, सप्त पर्णी, हार श्रृगांर के पेड़ को कटवाने जा रहा था। एक-दो पेड़ों की डालियां कटवा भी दी थीं। इसी बीच सुरुचि नगर में रहने वाले 61 वर्षीय वृक्ष मित्र सुनील दुबे का वहां से निकलना हुआ। पेड़ों की डालियों का कटता देख उन्होंने अपनी गाड़ी रोकी और पेड़ कटवाने वाले को समझाइश दी कि पेड़ों को मत काटो, जब उसने बात नहीं मानी तो उससे लड़ने लगे। उन्होंने साफ कहा कि आप पेड़ नहीं कटवा सकते। जब उन्हें धमकी मिली तो कमला नगर थाने से लेकर नगर निगम व कलेक्टर तक शिकायत कर दी। बाद में संबंधित व्यक्ति ने गलती मानी और पेड़ों को नहीं कटवाया।

सुनील दुबे इसी तरह लड़कर व धरना देकर शहर की अरेरा कॉलोनी, कोहेफिजा, कल्पना नगर, राजभवन गेट के सामने, गेमन इंडिया प्रोजेक्ट के पास समेत शहर के अलग-अलग स्थानों पर नीम, बहेड़ा, दल्दुल, शीशम, आम, जामुन सहित औषधीय व दुलर्भ प्रजातियों के पेड़ों को कटने से बचा चुके हैं। दुबे भोपाल सहित रायपुर, बिलासपुर, बनारस, गुजरात के कच्छ सहित अन्य शहरों में अब तक 21 हजार पौधे कटने से बचा चुके हैं। चार लाख पौधे नि:शुल्क बांटे चुके हैं। रविवार को चिनार पार्क में कंजी का पौधा लगाया। जिससे उनके द्वारा लगाए गए पौधों की संख्या तीन लाख हो गई। पौधे लगाने व नि:शुल्क बांटने के बाद वे उसकी देखरेख का भी ध्यान रखते हैं। उन्होंने बताया कि पेड़-पौधों से प्रेम करता हूं, इसलिए एक-एक पौधा लगाने व पेड़ों को बचाने पर पूरा ध्यान रखता हूं।

पौधों को लगाने व पेड़ों को कटने से बचाने के कार्य को देखते हुए सुनील दुबे को विश्व सेवा भारती सम्मान, राष्ट्रीय पर्यावरण दूत, श्रेष्ठ वृक्ष मित्र सम्मान मिल चुका है। अलग-अलग संस्थाओं द्वारा भी सम्मानित किए जा चुके हैं।

25 साल से लगा रहे पौधे

वृक्ष मित्र सुनील दुबे 25 साल से पौधे लगाने का काम कर रहे हैं। साल 2008 में उन्होंने मुंबई के बॉम्बे अस्पताल में ब्रेन ट्यूमर का ऑपरेशन कराया था। उस समय बॉम्बे अस्पताल के आसपास उन्हें कोई पेड़ दिखाई नहीं दिया। गर्मी में मरीजों व उनके परिजनों को छाया नहीं मिलती थी। उन्होंने बताया ब्रेन ट्यूमर का ऑपरेशन कराकर भोपाल आए तो सितंबर 2008 से एक अभियान के रूप में पौधे लगाना व उन्हें बचाने का काम शुरू कर दिया।

39 हजार रुपए महीने का वेतन पेड़-पौधों पर करते हैं खर्च

वृक्ष मित्र सुनील दुबे पीएचई में नौकरी करते हैं। उन्हें 39 हजार रुपए महीने का वेतन मिलता है, जो पेड़-पौधों पर खर्च करते हैं। उन्होंने बताया कि पत्नी सुधा दुबे शासकीय टीचर हैं। बेटा अर्पण दुबे पुणे में एक निजी कंपनी में है। पेड़ों को कटने से बचाने और पौधे लगाने मप्र के अलावा छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात के शहरों में जाता हूं। पौधे खरीदकर लगाता हूं। आने-जाने के दौरान किराया व साथ में अन्य लोगों का खर्चा स्वयं ही उठाता हूं। खरीदकर नि:शुल्क पौधे बांटता हूं।

पेड़ों को बचाने बनाया 40 सदस्यीय वृक्ष रक्षक दल

वृक्ष मित्र दुबे ने 40 सदस्यों का एक वृक्ष रक्षक दल बनाया है। इस दल में छात्र, युवक-युवतियां हैं जो शहर में पेड़ काटने व कटवाने वालों पर नजर रखते हैं। रक्षक दल का एक व्हाट्सएप ग्रुप भी है। जब भी आते-जाते किसी को पेड़ कटने का पता चलता तो व्हाट्सएप ग्रुप में शेयर किया जाता है। इससे मौके पर वृक्ष रक्षक दल के लोग पहुंच जाते हैं और पेड़ काटने वालों की शिकायत थाने, ननि अधिकारियों व कलेक्टर तक करते हैं।