मुंबई/भोपाल। 2008 Malegaon Blast Case : 2008 के मालेगांव ब्लास्ट केस में आरोपी भाजपा सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर इस मामले में आज स्पेशल एनआईए कोर्ट में पेश हुईं। बता दें कि खराब सेहत का हवाला देकर साध्वी प्रज्ञा ठाकुर गुरुवार को मुंबई की एनआईए कोर्ट में पेश नहीं हुई थी। उनके वकील ने कोर्ट को बताया था कि, वो हाई ब्लड प्रेशर की वजह से यात्रा नहीं कर सकती हैं। ऐसे में उन्हें पेशी से छूट दी जाए। इस पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए उन्हें व्यक्तिगत तौर पर पेश होने को कहा था। जिसके बाद आज वो पेशी के लिए मुंबई पहुंचीं है।

कोर्ट में सुनवाई के दौरान एनआईए के स्पेशल जज ने साध्वी प्रज्ञा ठाकुर से पूछा कि, "अब तक इस मामले में जितने भी चश्मदीदों के बयान हुए हैं, उसके मुताबिक एक बात साफ हुई है कि 29 सितंबर, 2008 के दिन एक धमाका हुआ था, जिसमें कई लोगों की जान गई थी। इस बारे में आपका क्या कहना है ? इस पर साध्वी प्रज्ञा ने जवाब दिया कि, मुझे कुछ नहीं मालूम।"

वहीं सुनवाई के दौरान स्पेशल जज ने उनसे पूछा कि, "क्या आपको ये पता है, ये आपके वकील ने बताया है कि अब तक इस केस में अभियोजन पक्ष ने कितने गवाहों का परीक्षण किया है? इस पर भी साध्वी ने एक ही जवाब दिया कि, मुझे इस बारे में कुछ नहीं मालूम।"

बता दें कि गुरुवार को जैसे ही इस केस की मुंबई की स्पेशल NIA कोर्ट की कार्यवाही शुरू हुई, प्रज्ञा के वकील प्रशांत मागू ने विशेष जज वीएस पाडलकर के सामने अपनी मुवक्किल की व्यक्तिगत पेशी से छूट की अर्जी दाखिल की। उन्होंने कोर्ट को बताया कि प्रज्ञा हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित हैं और वो भोपाल से मुंबई की यात्रा करने में अक्षम हैं। इस पर जज ने गुरुवार को पेशी से छूट मंजूर करते हुए कहा कि 'उन्हें किसी भी सूरत में शुक्रवार को पेश होना होगा, वरना इसके नतीजे भुगतने होंगे।"

पेशी से छूट की अर्जी कर दी थी खारिज

मालूम हो कि कोर्ट ने सोमवार को प्रज्ञा की पेशी से छूट की अर्जी यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि मुकदमे के इस चरण में उनकी मौजूदगी जरूरी है। प्रज्ञा ने संसद से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए इस सप्ताह पेशी से छूट मांगी थी। इन दिनों कोर्ट में अभियोजन के गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। कोर्ट ने पिछले महीने इस मामले में प्रज्ञा समेत सात आरोपितों को सप्ताह में कम से कम एक दिन पेश होने का निर्देश दिया था।

इस मामले में सभी आरोपित गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम कानून (यूएपीए) और आईपीसी की अलग-अलग धाराओं के तहत आरोपों का सामना कर रहे हैं।