भोपाल। नगर निगम के डीजल घोटाले में वरिष्ठ अधिकारियों पर भी कई सवाल खड़े होते रहे हैं। लेकिन निगम प्रशासन बड़े अधिकारियों को छोड़कर निचले स्तर के अधिकारी व कर्मचारियों पर कार्रवाई कर वरिष्ठों को बचाने में लगा हुआ है। अब जांच रिपोर्ट के आधार पर डीजल टैंक प्रभारी रहे मधुसूदन तिवारी पर गाज गिरी। तिवारी के निलंबन अवधि को अवैतनिक अवकाश में बदलने के साथ दो इंक्रीमेंट पर भी रोक लगा दी गई है। गुरुवार को डीजल घोटाले मामले पर निगमायुक्त बी विजय दत्ता ने अपर आयुक्त कमल सोलंकी से चर्चा भी की।

डीजल चोरी की जांच अपर आयुक्त मलिका निगम नागर से कराई गई थी। पिछले साल उन्होंने यह रिपोर्ट तत्कालीन निगमायुक्त अविनाश लवानिया को सौंप दी थी। इसमें उन्होंने खुलासा किया था कि किस तरह अधिकारियों, कर्मचारियों की मिलीभगत से रास्ते में ही टैंकर से डीजल चुरा लिया जाता था। फिर इसे कुप्पियों में भरकर बेच दिया जाता था। रिपोर्ट में एक अपर आयुक्त की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। रिपोर्ट में बताए बाकी दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई।

तब भी नहीं हुई थी निष्पक्ष कार्रवाई

डीजल चोरी का खुलासा जुलाई-2017 में हुआ था। तत्कालीन कमिश्नर ने दिसंबर मे सीवेज व फायर के प्रभारी और जलकार्य के सहायक यंत्रियों को नोटिस दिए थे। फिर मार्च-18 में 19 एएचओ, 14 एई और फायर व सीवेज प्रभारी को जीपीएस रिपोर्ट के आधार पर नोटिस दिए गए। ये बेअसर रहे। कई अधिकारियों ने इनका जवाब तक नहीं दिया। इसके बाद भी निगम प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की।

कर्मचारियों पर ही गिरी गाज

निगम के परिवहन शाखा में गड़बड़ियों की शुरुआत वर्कशॉप से शुरू हुई थी। तत्कालीन निगमायुक्त छवि भारद्वाज ने मामले को उजागर किया था। वाहनों के पार्ट की खरीदी की ई-फाइलिंग और वित्तीय नियमों का पालन न करने पर कर्मशाला के हेड मैकेनिक शमीम अहमद खान को निलंबित कर दिया। क्लर्क शशि नारायण मीणा और कंप्यूटर ऑपरेटर मोहम्मद सोहेल की सेवाएं खत्म कर दी थीं। परिवहन अधिकारी आरके परमार को कारण बताओ नोटिस भी थमाया।

सिर्फ फाइलों में ही मामला

इस मामले में तब परिवहन अधिकारी रहे आरके परमार के खिलाफ जांच की जा रही है। जो अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। परमार के खिलाफ ईओडब्ल्यू में शिकायत की गई थी। वर्कशॉप व डीजल टैंक मामले में गड़बड़ी के आरोप लगे थे। परमार पीएचई के अधिकारी थे और निगम में प्रतिनियुक्ति पर थे। ऐसे में तत्कालीन कमिश्नर ने पीएचई के आला अफसर को पत्र लिखकर परमार को बर्खास्त करने की सिफारिश की थी। इस पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई और परमार रिटायर भी हो गए।

शनिवार तक मांगे नोटिस के जवाब

बीते माह दो करोड़ रुपए के डीजल चोरी का खुलासा हुआ था। निगम के 785 वाहनों में जीपीएस लगा है। सिस्टम की मदद से कंट्रोल रूम में बैठकर वाहनों की मॉनिटरिंग की जाती है। इसके आधार पर वाहनों को दिए डीजल और कितना चले, इसकी रिपोर्ट तैयार की गई। डीजल टैंक प्रभारी प्रेमशंकर शुक्ला ने मई-2018 से जनवरी-19 तक की रिपोर्ट कमिश्नर को सौंपी थी। मामले पर निगमायुक्त ने 40 अफसरों को नोटिस थमा कर सात दिन में जवाब मांगा था। लेकिन इस आदेश की भी तामील ही नहीं हुई। उधर,अपर आयुक्त कमल सोलंकी से चर्चा कर निगमायुक्त ने शनिवार तक जवाब मांगा है।

निर्देश दिए हैं

मामले पर हम गंभीरता से काम किया जा रहा है। जिन्होंने नोटिस का जवाब नहीं दिया है उनसे हर हाल में शनिवार तक जवाब देने का निर्देश दिया है। जो भी दोषी पाया जाएगा हम कार्रवाई करेंगे- बी. विजय दत्ता, निगमायुक्त