भोपाल। निर्माण कार्यो में देरी की वजह से जनता के पैसे की किस तरह बर्बादी होती है, इसका नमूना भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने अपनी रिपोर्ट में दिया है। कैग ने बताया है कि मप्र में तीन विभागों के 24 प्रोजेक्ट में देरी होने की वजह से उनकी लागत 4 हजार 800 करोड़ रुपए बढ़ गई। इन 24 परियोजनाओं की शुरुआती लागत 1 हजार 104 करोड़ रुपए थी, जो बढ़कर 5 हजार 904 करोड़ रुपए हो गई।

कैग ने प्रोजेक्ट पूरे करने में बरती जा रही ढिलाई पर आपत्ति जताई है। कैग ने कहा है कि विकास परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए जल संसाधन विभाग, लोक निर्माण विभाग और नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण एक प्रक्रिया विकसित करें। रिपोर्ट के मुताबिक तीनों विभागों की करीब 242 परियाजनाएं ऐसी हैं, जो समय पर पूरी नहीं हो पाई।

इसमें जल संसाधन विभाग की 43, लोक निर्माण विभाग की 194 और नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की पांच परियोजनाएं शामिल हैं। इसमें से 24 परियोजनाओं की लागत का फिर से निर्धारण किया गया। इसमें जल संसाधन की एक, लोक निर्माण की 19 और नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की चार परियोजना शामिल हैं। कैग के मुताबिक सभी 242 अधूरी परियोजनाओं पर अब तक 8 हजार 600 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं, लेकिन इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।

1 हजार 712 करोड़ का नुकसान

एक अन्य मामले में भी कैग ने राज्य सरकार को हुए 1 हजार 712 करोड़ रुपए के नुकसान का खुलासा किया है। कैग ने बताया कि 2012 से 2017 तक कर्ज पर मिले ब्याज और सरकार द्वारा कर्ज पर चुकाए गए ब्याज के बीच अंतर के कारण राज्य को 1 हजार 712 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।