भोपाल। मीजेल्स और रुबेला से बचाव के लिए प्रदेश में 15 जनवरी से विशेष टीकाकरण अभियान शुरू किया जा रहा है। इसमें 9 महीने से 15 साल तक के बच्चों को (एमआर) टीका लगाया जाएगा।

मीजल्स (खसरा) का टीका पहले से बच्चों को लगता रहा है। लिहाजा कई माता-पिता बच्चों को फिर टीका लगवाने के पक्ष में नहीं हैं। स्वास्थ्य विभाग ने स्कूलों से फीडबैैक लिया तो यह जानकारी सामने आई है।

इस पर नेशनल हेल्थ मिशन (एनएनएम) के एमडी निशांत वरवड़े ने साफ किया है कि जिन्हें पहले से टीका लगा है उन्हें भी यह टीका लगवाना चाहिए। इससे बच्चों में इन बीमारियों के प्रतिरोधक क्षमता और बढ़ जाएगी। वह यहां एक होटल टीकाकरण अभियान को लेकर आयोजित एक कार्यशाला में बोल रहे थे।

अभी सिर्फ मीजेल्स का टीका लगाया जाता है। दोनों खतरनाक बीमारियां हैं। प्रदेश में सीधे या परोक्ष तौर पर हर साल पांच हजार बच्चों की मीजल्स से मौत हो जाती है। इसी तरह से प्रति लाख करीब 150 बच्चों को रुबेला से संक्रमित होने का खतरा रहता है।

दुनिया के 123 देश रुबेला से मुक्त घोषित हो चुके हैं। देश के 28 राज्यों में एमआर का टीका शुरू हो चुका है। सबसे आखिर में मप्र में शुरू हो रहा है। कार्यशाल में एनएचएम के संचालक डॉ. बीएन चौहान, राज्य टीकाकरण अधिकारी डॉ. संतोष शुक्ला, डिप्टी डायरेक्टर डॉ. ओपी तिवारी, यूनिसेफ की स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. वंदना भाटिया मौजूद थीं।

इस तरह लगेगा टीका

प्रदेश में 9 महीने से 15 साल तक के 2 करोड़ 32 लाख बच्चों को 15 जनवरी से एक महीने तक अभियान चलाकर टीका लगाया जाएगा। बड़े स्कूलों में चिकित्सकीय स्टाफ की मौजूदगी में टीका लगेगा। बाकी स्कूली बच्चों को अस्पताल बुलाकर टीका लगाया जाएगा। टीकाकरण सिर्फ अस्पतालों (जिला अस्पताल, सीएचसी व पीएचसी) में किया जाएगा। बचे हुए बच्चों का आशा व एएनएम सर्वे कर अस्पताल लाएंगी।

खतरनाक हैं दोनों बीमारियां

मीजल्स और रुबेला के लक्षण एक जैसे होते हैं। शरीर में दाने, नाक बहने के साथ ही तेज बुखार आता है। मीजेल्स से बच्चों की मौत भी हो सकती है। रुबेला से सबसे ज्यादा नुकसान गर्भस्थ शिशु को होता है। गर्भ की पहली तिमाही में यह बीमारी होती है तो गर्भपात होने, बच्चे के गर्भ में दम तोड़ने या जन्मजात विकृति का बहुत ज्यादा खतरा रहता है।

जिसके बारे में आप जानना चाहते हैं

-टीका लगवाने से कोई तकलीफ तो नहीं होगी।

जवाब: करीब 10 फीसदी बच्चों को सामान्य प्रतिक्रिया जैसे हल्का बुखार, ललामी हो सकती है।

-पहले खसरे का टीका लगा है फिर क्यों लगवाएं

जवाब: पूरे समुदाय की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए अतिरिक्त खुराक जरूरी है। इससे बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता और बढ़ेगी।

-टीका लगने के कितने बाद बच्चे बीमारी से सुरक्षित हो जाते हैं

जवाब: बच्चों में छह हफ्ते में बीमारी से लड़ने की ताकत आ जाती है।

-किन बच्चों को टीका नहीं लगवाएं

जवाब-जिस बच्चे को तेज बुखार है। कैंसर की दवा चल रही है। किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित है।

(राज्य टीकाकरण अधिकारी डॉ. संतोष शुक्ला के अनुसार)